Kashmir:पढ़ें रवीश कुमार को

Read Ravish Kumar
कश्मीर ताले में बंद है। कश्मीर की कोई ख़बर नहीं है। शेष भारत में कश्मीर को लेकर जश्न है। शेष भारत को कश्मीर की ख़बर से मतलब नहीं है। एक का दरवाज़ा बंद कर दिया गया है। एक ने दरवाज़ा बंद कर लिया है।
यह अंधेरा नहीं है। बहुत तेज़ उजाला है। सुनाई ज़्यादा देता है, दिखाई कम देता है। लोक ने लोकतंत्र को ख़ारिज कर दिया है। परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। लोगों को अपने बीच कोई शत्रु मिल गया है। कभी वो मुसलमान हो जाता है कभी कश्मीरी हो जाता है। नफ़रत के कई कोड से लोगों की प्रोग्रामिंग की जा चुकी है। उन्हें बस इससे संबंधित शब्द दिख जाना चाहिए उनकी प्रतिक्रिया समान रूप से छलक आती है।
उम्मीद है कश्मीर में कर्फ़्यू की मियाद लंबी न हो। हालात सामान्य हों। कश्मीर के लोगों का आपसी संपर्क टूट चुका है। जो कश्मीर से बाहर हैं वे अपने घरों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इस स्थिति में जश्न मनाने वालों का कलेजा बता रहा है कि हम क्या हो चुके हैं।
कश्मीर में ज़मीन ख़रीदने की ख़ुशी है। दूसरे राज्यों से भी ऐसे प्रावधान हटाने की ख़ुशी मनाने की माँग करनी चाहिए। उन आदिवासी इलाक़ों में जहाँ पाँचवी अनुसूची के तहत ज़मीन ख़रीदने की बंदिश है वहाँ भी नारा लग सकता है कि जब तक यह नहीं हटेगा भारत एक नहीं होगा। तो क्या एक भारत की माँग करने वाले अपने इस नारे को लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में भी जाएँगे या फिर कश्मीर तक ही सीमित रहेंगे?
तरीक़ा तो अच्छा नहीं था, दुआ कीजिए नतीजा अच्छा हो। लेकिन नीयत ठीक न हो तो नतीजा कैसे अच्छा हो सकता है। कश्मीर को इसकी काफी क़ीमत चुकानी पड़ रही थी। शायद कश्मीर को शेष भारत की आधी अधूरी जानकारी का कोपभाजन न बनना पड़े। क्या ऐसा होगा? किसी को कुछ पता नहीं है। कश्मीरी लोगों की चिन्ता की जानी चाहिए। उन्हें गले लगाने का समय है।
इतिहास बन रहा है। एक कारख़ाना खुला है। उसमें कब कौन सा इतिहास बन कर बाहर आ जाए किसी को पता नहीं चलता है। जहाँ इतिहास बना है वहाँ ख़ामोशी है। जहाँ जश्न है वहाँ पहले के किसी इतिहास से मतलब नहीं है। जब मतलब होता है तो इतिहास को अपने हिसाब से बना लेते हैं। सदन में अमित शाह ने कहा कि नेहरू कश्मीर हैंडल कर रहे थे। सरदार पटेल नहीं। यह इतिहास नहीं है। मगर अब इतिहास हो जाएगा क्योंकि अमित शाह ने कहा है। उनसे बड़ा कोई इतिहासकार नहीं है।
Ravish Kumar
Credit:Socail Media

One Comment on “Kashmir:पढ़ें रवीश कुमार को”

  1. Ravish ji u r a very noble,upright and honest person. These qualities qualify u to b d most eligible enemy of d present ruling despensation. Anybody who has courage or conviction to protest against any kind of a wrong today becomes,not only d enemy of state but also anti-national ,traitor and anti Hindu. However, this despair and darkness has never been everlasting before nor shall it continue eternally herafter, d question is what price wud d nation pay for reviving a dead conscience and recognizing d real’ Nero’ in disguise of a Hero

    Ather

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