SGPGI: लिवर कैंसर से पीड़ित 2 बच्चों की सफल रोबोटिक सर्जरी

लखनऊ, 8 अक्टूबर। संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) ने चिकित्सा जगत में एक नया कीर्तिमान रचा है। संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशलिटी विभाग ने हेपेटोब्लास्टोमा (लिवर कैंसर) से पीड़ित दो शिशुओं की सफलतापूर्वक सर्जरी की है। इन दोनों मरीजों का वजन 6 किलो से भी कम था। डॉक्टरों ने रोबोटिक लिवर रिसेक्शन तकनीक (लिवर का प्रभावित हिस्सा हटाना) का इस्तेमाल कर यह जटिल ऑपरेशन पूरा किया।
चिकित्सा जगत में इसे भारत में शिशुओं पर की गई अपनी तरह की पहली रोबोटिक लिवर रिसेक्शन सर्जरी माना जा रहा है। यह कम उम्र और कम वजन वाले बच्चों की जटिल सर्जरी में एक बड़ी तकनीकी प्रगति है।
दो शिशुओं की बची जान
पहला मामला 7 महीने के एक बच्चे का था। इस बच्चे का वजन लगभग 5 किलो था। जांच में उसके लिवर के बाएं हिस्से (लेफ्ट लोब) में हेपेटोब्लास्टोमा का पता चला था। प्री-ऑपरेटिव कीमोथेरेपी के बाद 5 सितंबर 2026 को डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक उसकी रोबोटिक लेफ्ट लेटरल सेक्शनेक्टॉमी की।
दूसरा मामला 7 महीने की एक बच्ची का था। इसका वजन करीब 6 किलो था। बच्ची के भी लिवर के बाएं हिस्से में ट्यूमर था। नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी देने के बाद 3 अक्टूबर 2026 को उसकी रोबोटिक लेफ्ट हेपेटेक्टॉमी पूरी की गई।

सर्जरी में थीं कई बड़ी चुनौतियां
शिशुओं के लिवर की सर्जरी चिकित्सा विज्ञान की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में गिनी जाती है। बच्चों के पेट में ऑपरेशन के लिए बेहद कम जगह होती है। उनकी रक्त वाहिकाएं और पित्त नलिकाएं बहुत पतली और नाजुक होती हैं। ऑपरेशन के दौरान लिवर की कार्यक्षमता को सुरक्षित रखना और खून बहने पर सटीक नियंत्रण पाना सबसे बड़ी चुनौती थी। रोबोटिक तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने यह काम बेहद सटीकता से किया।

बच्चों की सेहत में तेजी से सुधार
दोनों बच्चों की सर्जरी के बाद सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। फिलहाल दोनों स्वस्थ हैं और उनकी आगे की एडजुवेंट कीमोथेरेपी जारी है।
इस जटिल और सफल इलाज में एसजीपीजीआई की कई टीमों ने मिलकर काम किया। इनमें पीडियाट्रिक सर्जिकल, पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस और मल्टीडिसिप्लिनरी सपोर्ट टीमों का अहम योगदान रहा।
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