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पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने बनाई ‘जननीति भारत’ पार्टी, 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी

लखनऊ : पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने गुरुवार (15 अक्टूबर 2026) को अपनी नई राजनीतिक पार्टी जननीति भारत के गठन का ऐलान किया। एक्स (ट्विटर) पर करीब 8.5 मिनट के वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी, ताकि सरकार हर कदम पर जनता के हिसाब से चले, सिर्फ चुनाव वाले एक दिन नहीं।

वीडियो में दिव्या मित्तल ने कहा, “मेरा राजनीतिक सफर का अगला कदम। मेरे साथ जुड़ें।” उन्होंने बताया कि राजनीति में आने की घोषणा के बाद उन्होंने एक नंबर शेयर किया था, जिस पर इतने संदेश आए कि व्हाट्सऐप ने नंबर ब्लॉक कर दिया। माफी मांगते हुए उन्होंने कहा कि वे उम्मीद का दीया लेकर निकली थीं, लेकिन लोगों के संदेशों ने सूरज जैसा माहौल बना दिया।

पार्टी का नाम और विचार

दिव्या मित्तल ने गंगा का उदाहरण देते हुए कहा कि गंगा में हर बूंद बराबर होती है और रास्ता खुद तय करती है। उन्होंने कहा, “मुझे ऐसी ही पार्टी बनानी है जिसमें हर व्यक्ति एक बूंद हो और हर बूंद गंगा। ऐसी सोच से निकली पार्टी का नाम है जननीति भारत।”

उन्होंने साफ कहा, “आप पूछेंगे कि पार्टियों की कमी है क्या? कमी पार्टियों की नहीं, सुनवाई की है। सुनवाई कुछ की होती है, सबकी नहीं।” आगे उन्होंने कहा, “राजनीति आप पर राज करती है। जननीति में राज आपका होगा।” पार्टी का मकसद है कि सरकार पांच साल में सिर्फ एक दिन नहीं, हर कदम पर जनता के हिसाब से चले।

तीन वचन

वीडियो में उन्होंने पार्टी के तीन मुख्य वचन बताए:

  1. जन से नीति, नीति से भारत — देश की नीतियों के केंद्र में आम लोग होंगे और उन नीतियों को तय भी लोग ही करेंगे। उन्होंने मिर्जापुर में देव कली देवी का उदाहरण दिया, जिन्होंने पानी न होने के बावजूद स्कूल मांगा था। काम शुरू हुआ, लेकिन जमीन जंगल की होने से रुक गया। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगपतियों के कारखाने के लिए जंगल 80 दिन में रास्ता दे देता है, जबकि गरीब के स्कूल या रास्ते की फाइल 80 साल घूमती रहती है। नीति वही होनी चाहिए जहां न्याय हो, और न्याय वहां जहां सबकी सुनवाई हो।
  2. जरूरत से फैसला और फैसले में बराबरी — हर फैसला जरूरत देखकर होगा, पहचान (जाति, धर्म, हैसियत) देखकर नहीं। उन्होंने सड़क मोड़ने का उदाहरण दिया, जहां एक की उंगली से हजारों का फायदा टल गया। महिलाओं की सुरक्षा के लिए उन्होंने मोबाइल ऐप का सुझाव दिया, जहां लड़कियां असुरक्षित जगह मार्क करें और 100 निशान होने पर लाइट, गश्त और कैमरा लगे।
  3. जनता को हिसाब और हिसाब से सुधार — हर काम का हिसाब जनता लेगी। गांव के काम (नाली, खड़ंजा, हैंड पंप) फोन पर नक्शे में दिखने चाहिए। स्कूल, अस्पताल, राशन की दुकान आदि पर हरा-पीला-लाल रंग से फीडबैक दिया जाएगा, जो अधिकारियों और मंत्री तक पहुंचेगा। इससे कमी पता चलेगी और सुधार होगा।

उन्होंने विधायकों की भूमिका भी बताई कि वे जनता की ओर मुंह करके बैठेंगे, जो लिख या मार्क नहीं कर सकते उनकी मदद करेंगे।

अभियान और अपील

दिव्या मित्तल ने कहा कि पार्टी के पास न पैसा है न विज्ञापन, इसलिए लड़ाई पोस्टर से नहीं, घर-घर से लड़ी जाएगी। हर घर दफ्तर और हर व्यक्ति प्रचारक होगा। उन्होंने लोगों से अपने गांव या कस्बे में बुलाने की अपील की और वीडियो तीन लोगों को शेयर करने को कहा, साथ में तीन शब्द लिखने को: “राजनीति नहीं जननीति।” वेबसाइट janneetibharat.com भी शेयर की गई।

पृष्ठभूमि

दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी थीं (यूपी कैडर)। उन्होंने 30 अगस्त 2026 को 13 साल की सेवा के बाद स्वैच्छिक इस्तीफा दिया था। 29 सितंबर को उन्होंने राजनीति में आने और किसी मौजूदा पार्टी में शामिल न होने की घोषणा की थी।

वे IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर की alumna हैं। IAS से पहले लंदन में Wall Street/exotic derivatives trader के रूप में काम कर चुकी हैं। उन्होंने IPS भी क्वालीफाई किया था, लेकिन दोबारा परीक्षा देकर IAS में शामिल हुईं। प्रशासनिक करियर में वे संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रहीं। मिर्जापुर में पाइपलाइन पानी पहुंचाने (लाहुरिया दह गांव) और अन्य जनकल्याणकारी कामों के लिए चर्चा में रहीं।

कुछ स्थानीय रिपोर्टों में मिर्जापुर सदर/नगर सीट से उनके चुनाव लड़ने की चर्चा है, हालांकि आधिकारिक वीडियो में उन्होंने व्यक्तिगत सीट का ऐलान नहीं किया। पार्टी पूरे यूपी में चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

यह ऐलान 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल बढ़ाता है, जहां दिव्या मित्तल प्रशासनिक अनुभव और जनभागीदारी के नारे के साथ नई राजनीतिक पारी शुरू कर रही हैं।

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