
लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहे विवादों और अनियमितताओं पर उत्तर प्रदेश शासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ‘लव जिहाद’ और संदिग्ध नियुक्तियों के मामले में एसटीएफ (STF) की एंट्री के बाद, अब शासन ने केजीएमयू में तदर्थ (Ad-hoc) रूप से नियुक्त कर्मियों के नियम विरुद्ध स्थायीकरण (Regularisation), प्रमोशन और पेंशन लाभ दिए जाने के मामले में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।
सैयद अख्तर अब्बास सहित कई कर्मियों पर गिरी गाज
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, केजीएमयू में तदर्थ रूप से नियुक्त सैयद अख्तर अब्बास सहित कई अन्य कर्मियों को बिना विनियमितीकरण (Regularisation) के ही स्थायी करने और पदोन्नति देने की गंभीर शिकायतें मिली थीं। इन कर्मियों को नियमों को ताक पर रखकर सेवानिवृत्तिक लाभ (Retirement benefits) और पेंशन भी प्रदान की गई। इन सभी वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच केजीएमयू अधिनियम की धारा 13 के अंतर्गत कराई जाएगी।
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विशेष सचिव कृतिका शर्मा की अध्यक्षता में जांच
इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए शासन ने दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। जिसमें विशेष सचिव, (चिकित्सा शिक्षा विभाग, उ०प्र० शासन) कृतिका शर्मा और वित्त नियंत्रक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उ०प्र०) को को शामिल किया गया है। यह समिति प्रकरण से संबंधित सभी बिंदुओं की गहन जांच कर अपनी आख्या (रिपोर्ट) सीधे शासन को सौंपेगी ।
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लगातार विवादों में रहा है KGMU प्रशासन
यह जांच समिति ऐसे समय में गठित की गई है जब केजीएमयू प्रशासन पहले से ही कई गंभीर आरोपों से घिरा हुआ है। पिछले कुछ समय में केजीएमयू में एक के बाद एक कई बड़े विवाद सामने आए हैं:
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VHP का प्रदर्शन और STF जांच: हाल ही में केजीएमयू में नियुक्तियों में धांधली और ‘लव जिहाद’ जैसे गंभीर मामलों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने जोरदार प्रदर्शन किया था। बढ़ते दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘लव जिहाद’ और अवैध नियुक्तियों के मामले की जांच यूपी एसटीएफ (UP STF) को सौंप दी थी।
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रिटायर्ड कर्मचारियों की मलाईदार पदों पर तैनाती: इससे पहले यह मामला भी गरमाया था कि केजीएमयू में महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर सेवानिवृत्त (Retired) कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त कर उपकृत किया जा रहा है, जिससे विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
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VC के OSD की छुट्टी: बढ़ते विवादों और प्रशासनिक दबाव के बीच कुलपति (VC) के ओएसडी (OSD) अब्बास को दो दिन पहले ही उनके पद से हटा दिया गया था।

सैयद अख्तर अब्बास का नाम इन प्रशासनिक विवादों में पहले भी उछलता रहा है। अब शासन के इस सीधे हस्तक्षेप और जांच समिति के गठन से यह साफ हो गया है कि केजीएमयू के भीतर नियमों की अनदेखी कर मलाई काटने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जल्द ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है।




