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ABVMU VC Interview: अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी को जल्द मिलेगा नया कुलपति, 26 नवंबर को साक्षात्कार; दौड़ में 12 दिग्गज डॉक्टर

अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल यूनिवर्सिटी (ABVMU) के कुलपति (Vice Chancellor) पद के लिए चयन प्रक्रिया तेज हो गई है। लंबे इंतजार के बाद साक्षात्कार की तारीख मुकर्रर कर दी गई है। आगामी 26 नवंबर को नए कुलपति के चयन के लिए इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए गठित सर्च कमेटी ने देश भर के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से करीब 12 से अधिक वरिष्ठ डॉक्टरों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया है।

साक्षात्कार की प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शुरू होगी। इस दौड़ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), वाराणसी के मेडिकल संस्थान और एम्स (AIIMS) समेत देश के अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर शामिल हैं। चयन समिति इन अभ्यर्थियों की योग्यता और विजन को परखने के बाद शासन को अपनी संस्तुति भेजेगी।

डॉ. संजीव मिश्र का कार्यकाल और विस्तार

मौजूदा समय में केजीएमयू के कैंसर सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव मिश्र अटल यूनिवर्सिटी के कुलपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे यहां प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर हैं। डॉ. मिश्र का नियमित कार्यकाल 26 सितंबर 2025 को समाप्त हो गया था। हालांकि, उस समय नए कुलपति का चयन नहीं हो पाने के कारण उनका कार्यकाल अगले छह महीने या नए कुलपति की नियुक्ति होने तक के लिए बढ़ा दिया गया था।

डॉ. संजीव मिश्र का अनुभव काफी व्यापक है। अटल यूनिवर्सिटी में तीन साल से अधिक समय देने से पहले वे करीब 10 साल तक जोधपुर एम्स के निदेशक (Director) रह चुके हैं।

केजीएमयू में डॉक्टरों की कमी

डॉ. संजीव मिश्र केजीएमयू के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष भी हैं, लेकिन वे पिछले करीब 13 साल से अवकाश (Leave) पर चल रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति का असर केजीएमयू की सेवाओं पर भी पड़ रहा है। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है और प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं, लेकिन विभाग में फिलहाल केवल चार डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं।

पटरी से उतरी यूनिवर्सिटी की व्यवस्था

उत्तर प्रदेश के मेडिकल और पैरामेडिकल कॉलेजों के सत्र को नियमित करने और समय पर परीक्षाएं कराने के उद्देश्य से अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई थी। लेकिन, धरातल पर यूनिवर्सिटी कई चुनौतियों से जूझ रही है:

  • स्टाफ की भारी कमी: यूनिवर्सिटी के पास अभी तक एक भी नियमित फैकल्टी या स्थायी कर्मचारी नहीं है। पूरा काम प्रतिनियुक्ति और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।

  • संबद्धता और परीक्षा: प्रदेश के करीब 360 नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज इस यूनिवर्सिटी से संबद्ध (Affiliated) हैं। संसाधनों की कमी के कारण दूर-दराज से आने वाले कॉलेज प्रबंधकों और छात्र-छात्राओं की समस्याओं की सुनवाई नहीं हो पा रही है।

  • छात्रों की परेशानी: नर्सिंग और पैरामेडिकल के कई बैच की परीक्षाएं समय पर नहीं हो पा रही हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

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