अयोध्या। प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में आज एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। राम मंदिर के भव्य शिखर पर धर्मध्वज (Dharma Dhwaj) का विधिवत प्रतिष्ठापन किया गया। यह क्षण अयोध्या के संत समाज और करोड़ों रामभक्तों के लिए भावुक कर देने वाला था। 500 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा, संघर्ष और तपस्या के बाद, प्रभु श्रीराम के धाम पर धर्मध्वजा का फहराना सनातन आस्था की वैश्विक जीत का प्रतीक बन गया है।
500 वर्षों के संघर्ष की विजय
अवधपुरी का संत समाज इस दृश्य को देखकर श्रद्धा और भावनाओं से अभिभूत हो उठा। संतों ने इसे केवल एक ध्वज का आरोहण नहीं, बल्कि सनातन गौरव की पुन: स्थापना बताया। संतों का कहना है कि यह वह क्षण है जिसकी कल्पना उनके पूर्वजों ने सदियों पहले की थी। यह ध्वजा उस अदम्य साहस और धैर्य का प्रमाण है, जो रामभक्तों ने सैकड़ों वर्षों तक अपनी छाती में संजोए रखा।
डबल इंजन सरकार की भूमिका पर संतों का बयान
अयोध्या के साधु-संतों ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व को दिया है। संत समाज का मानना है कि ‘डबल इंजन सरकार’ ने जिस तरह सनातन परंपराओं के संरक्षण और मंदिर संस्कृति के पुनरुद्धार (Renovation) का बीड़ा उठाया है, उससे देश की आध्यात्मिक चेतना जागृत हुई है। मठ-मंदिरों का विकास और संतों को सम्मान देना सरकार की प्राथमिकता रही है।
CM योगी धर्म के प्रहरी: संत दिलीप दास
राम वैदेही मंदिर के प्रतिष्ठित संत दिलीप दास ने इस मौके पर बड़ी बात कही। उन्होंने कहा, “अयोध्या मिशन के तहत सनातन संस्कृति का जो पुनरुद्धार हुआ है, वह प्रशंसनीय है।” उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि धर्म परंपरा का रक्षक और प्रहरी बताया।
विवाह पंचमी पर विशेष संयोग
धर्मध्वज की स्थापना का यह कार्यक्रम Vivah Panchami के पावन अवसर पर हुआ, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया। इस दौरान साधु-संतों ने प्रभु श्रीराम और माता जानकी के विवाह पर्व का विशेष पूजन-अर्चन भी किया। संत समाज का विश्वास है कि राम मंदिर के शिखर पर लहराता यह ध्वज भारत के उज्ज्वल भविष्य और सनातन समाज के आत्मगौरव का शंखनाद करेगा।
