दिव्यांगों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरणों के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतज़ार, विशेषज्ञों की भारी कमी

LUCKNOW: उत्तर प्रदेश में दिव्यांगों को कृत्रिम और सहायक उपकरण पाने के लिए अब भी लंबा इंतजार झेलना पड़ रहा है। दिव्यांगों को कृत्रिम व सहायक उपकरण आसानी से नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह संस्थानों में प्रोस्थेटिस्ट ऑर्थोटिस्ट विशेषज्ञों की भारी कमी कमी है। लखनऊ के केजीएमयू सहित दूसरे संस्थानों में पद खाली पड़े हैं।
यह बातें केजीएमयू के पीएमआर विभाग की ऑर्थोटिक्स-प्रोस्थेटिक्स कार्यशाला के पूर्व प्रबंधक और प्रभारी अरविंद कुमार निगम ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स दिवस पर इंदिरानगर स्थित एक होटल में आयोजित संगोष्ठी में कही।
ऑर्थोटिक्स एंड प्रोस्थेटिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उत्तर प्रदेश चैप्टर की ओर से आयोजित संगोष्ठी में अरविंद कुमार निगम ने बताया कि राजधानी लखनऊ में तीन प्रमुख संस्थान हैं, जहां प्रोस्थेटिस्ट-ऑर्थोटिस्ट संवर्ग के पद स्वीकृत हैं, लेकिन लगभग सभी जगहों पर भारी रिक्तियां हैं।
केजीएमयू लिंब सेंटर के पीएमआर विभाग में पिछले 10–15 वर्षों से 8 पद खाली हैं और पूरी कार्यशाला मात्र एक विशेषज्ञ के भरोसे चल रही है।
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में प्रोस्थेटिक्स-ऑर्थोटिक्स शिक्षकों के 8 पद रिक्त हैं, और संविदा शिक्षकों के भरोसे डिग्री व पीजी कोर्स संचालित किए जा रहे हैं।
वहीं, एक अन्य वर्कशॉप में 2015 से 12 से अधिक पद खाली हैं, जिसे एक कार्यशाला प्रबंधक और एक ऑर्थोटिस्ट चला रहे हैं।
लोहिया संस्थान में भी पूरा विभाग सिर्फ एक वरिष्ठ प्रोस्थेटिस्ट के सहारे चल रहा है।
निगम ने सरकार से मांग की कि दिव्यांगों के हित में इन सभी रिक्त पदों को जल्द भरा जाए ताकि उपकरण निर्माण और वितरण की प्रक्रिया तेज़ हो सके।
कार्यक्रम में एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार ने सभी 75 जिलों में दिव्यांग कृत्रिम अंग निर्माण शाखाएं खोलने की घोषणा की है। इससे न केवल दिव्यांगों को राहत मिलेगी, बल्कि विशेषज्ञों के लिए नए रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे। कार्यक्रम में वीरेंद्र प्रसाद, आशीष सिंह, सत्यवान मिश्रा,राजेश मिश्रा, श्वेता यादव समेत अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।



