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KGMU : बाबर ने केजीएमयू की वीसी और नोडल अधिकारी के खिलाफ एफआईआर के लिए दी तहरीर

लखनऊ (Lucknow): देश के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में अवैध मजारों को हटाने को लेकर चल रहा विवाद अब पुलिस थाने तक पहुंंच गया है। मेडिकल यूनिवर्सिटी परिसर में स्थित “हजरत शाह कवामुद्दीन अब्बासी उर्फ हाजी हरमैन शाह ” दरगाह के मुतवल्ली (प्रबंधक) ने केजीएमयू की वाइस चांसलर प्रो.सोनिया नित्यानंद और नोडल अधिकारी डॉ. केके सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के लिए चौक कोतवाली में तहरीर दी है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केजीएमयू प्रशासन (KGMU) परिसर से अतिक्रमण हटाने के लिए लगातार नोटिस जारी कर रहा है, और दावा किया जा रहा है कि इस कदम से समुदाय विशेष में गहरा आक्रोश है।

क्या है ताज़ा मामला? (What is the Complaint?)

चौक पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, प्रार्थी सैयद बाबर इस्लाम ने आरोप लगाया है कि केजीएमयू प्रशासन ने वक्फ बोर्ड में पंजीकृत दरगाह (पंजीकरण संख्या 94/2) की पवित्रता भंग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोप है कि वीसी प्रो. सोनिया नित्यानंद और नोडल अधिकारी डॉ. केके सिंह, 15-20 अन्य लोगों के साथ दरगाह परिसर में अवैध रूप से दाखिल हुए। शिकायतकर्ता का दावा है कि अधिकारियों ने वहां मौजूद धार्मिक संरचनाओं, चबूतरे और दीवारों को क्षतिग्रस्त किया। विरोध करने पर श्रद्धालुओं को “बुलडोजर चलवा देने” और पुलिस से गिरफ्तार करवाने की धमकी दी गई।

यह भी पढ़ें: KGMU में अवैध मजारों पर चलेगा बुलडोजर, प्रशासन ने दिया 15 दिन में जमीन खाली करने का ‘अल्टीमेटम’ 

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया गया है कि दरगाह के वजूखाने और इबादत की जगह पर गाड़ियां खड़ी कर दी गई हैं, जिससे नमाज और अन्य धार्मिक कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। तहरीर में दावा किया गया है कि संपत्ति को 1 लाख रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया गया है।

पूर्व का घटनाक्रम 

यह घटनाक्रम पिछले एक महीने से चल रहे उस विवाद का हिस्सा है, जिसमें केजीएमयू (KGMU) प्रशासन ने परिसर में मौजूद “अवैध धार्मिक स्थलों” को हटाने का अभियान छेड़ा है। जनवरी 2026 में केजीएमयू प्रशासन ने परिसर की कई मजारों पर नोटिस चस्पा कर उन्हें 15 दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया था। प्रशासन का तर्क है कि ये निर्माण सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हैं और अस्पताल के विस्तार व मरीजों के आवागमन में बाधा बन रहे हैं।

विवाद बढ़ने पर केजीएमयू (KGMU) के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने सफाई दी थी कि “शाह मीना शाह और हरमैन शाह” जैसी ऐतिहासिक मजारों को कोई नोटिस नहीं दिया गया है। हालांकि, पुलिस में दी गई तहरीर इस दावे के ठीक विपरीत है, जिसमें सीधे तौर पर हरमैन शाह दरगाह में तोड़फोड़ का आरोप लगाया गया है।

इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और आजाद समाज पार्टी जैसे दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नेताओं का कहना है कि ये दरगाहें केजीएमयू के अस्तित्व में आने से सदियों पहले की हैं और वक्फ संपत्ति हैं, जिन पर प्रशासन का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।

केजीएमयू (KGMU) प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत केवल उन निर्माणों को ही हटाया जा रहा है जिनका कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्‍ध नहीं है। प्रशासन ने सुरक्षा और स्वच्छता का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को जरूरी बताया है।

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