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श्री गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा: थारू जनजातीय क्षेत्रों में पहले दिन उमड़ा जनसैलाब, 70 हजार से अधिक ग्रामीणों ने लिया स्वास्थ्य लाभ

पीलीभीत/लखीमपुर/बलरामपुर: नेशनल मेडिकोज़ आर्गेनाइजेशन (NMO) अवध एवं गोरक्ष प्रांत तथा श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘श्री गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा’ के छठे संस्करण की भव्य शुरुआत शुक्रवार 6 फरवरी को सुबह 9:00 बजे से हुई। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित थारू जनजातीय बहुल इलाकों में आयोजित इन स्वास्थ्य मेलों की श्रृंखला प्रदेश के सात सीमावर्ती जिलों में एक साथ शुरू की गई।

मुख्यमंत्री ने किया वर्चुअल शुभारंभ

सुबह ऑनलाइन माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल संदेश देकर इस सेवा यात्रा का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने चिकित्सकों के सेवा भाव की सराहना करते हुए इसे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया।

7 जिलों में 1000 चिकित्सकों ने संभाली कमान

सेवा यात्रा के पहले दिन पीलीभीत में 10, लखीमपुर में 30, बलरामपुर में 40, श्रावस्ती में 25, बहराइच में 30, सिद्धार्थनगर में 10 और महाराजगंज में 10 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में स्थानीय और बाहरी क्षेत्रों से आए लगभग 1000 चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दीं। उल्लेखनीय है कि लखनऊ से एनएमओ और सेवा न्यास द्वारा लगभग 20 बसों के माध्यम से चिकित्सकों के दल को कल रात्रि ही इन क्षेत्रों के लिए रवाना कर दिया गया था।
जनजातीय संस्कृति के बीच चिकित्सकों का अनुभव
चिकित्सकों के इन दलों को सीमावर्ती गांवों तक पहुंचाने में एकल अभियान, सीमा जागरण मंच, वनवासी कल्याण आश्रम, विश्व हिंदू परिषद और सेवा भारती जैसे संगठनों के कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों ने स्थानीय संस्कृति को समझने के लिए रात्रि विश्राम जनजातीय परिवारों के बीच किया, जो उनके लिए एक अनूठा अनुभव रहा।

जागरूकता और निशुल्क उपचार

शिविरों के दौरान चिकित्सकों ने न केवल स्वास्थ्य परीक्षण किया और निशुल्क दवाइयां बांटी, बल्कि ग्रामीणों को संतुलित आहार, माहवारी स्वच्छता और व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे विषयों पर जागरूक भी किया। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यात्रा के पहले ही दिन 70,000 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

NMO अवध प्रांत के महामंत्री डॉ. शिवम् मिश्र ने बताया कि कल, 7 फरवरी को भी ग्रामीण क्षेत्रों में शिविरों का आयोजन जारी रहेगा। इसके बाद 8 फरवरी को प्रत्येक जिले में विशाल स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया जाएगा। यह यात्रा पिछले सात वर्षों से निरंतर सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य क्रांति लाने का कार्य कर रही है।

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