Lucknow: देव दिपावली पर काशी के घाट 25 लाख दीयों से जगमग होंगे। आगामी 5 नवंबर को होने वाला यह उत्सव इस बार 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो के जरिए और भी खास होगा।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि ’देवों की दिवाली’ वाराणसी आने वाले हर आगंतुक के लिए यादगार हो। महादेव की नगरी में अर्धचंद्राकार घाट करीब 25 लाख दीयों की माला से सजकर साक्षात दिव्यता का रूप धारण करेंगे, तो गंगा पार रेत पर रंग, रोशनी और संगीत का समावेशी प्रदर्शन सृष्टि को आलोकित करेगा। वहीं 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो की अद्भुत झलक श्रद्धालुओं को विस्मरणीय अनुभव करायेगी। इस मनमोहक प्रस्तुति में गंगा, काशी और देव दीपावली की पावन कथा को 25 मिनट के दर्शनीय अनुभव में पिरोया जाएगा, जिसमें 17 मिनट की प्रोजेक्शन मैपिंग और 8 मिनट का लेजर शो सम्मिलित होगा।
जयवीर सिंह ने बताया 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग के जरिए देव दीपावली, काशी-वाराणसी, भगवान शिव, गंगा और अन्य पौराणिक विषयों पर आधारित प्रस्तुतियां होंगी। गंगा तट स्थित प्राचीन इमारतों की दीवारों और घाटों पर आधुनिक लेजर तकनीक के माध्यम से विभिन्न छवियां उकेरी जायेंगी। हिंदी में संवाद के माध्यम से संबंधित कहानियां बताई जायेगी। वहीं इस बार देव-दीपावली पर वाराणसी के घाटों पर करीब 25 लाख दीप प्रज्वलित किए जायेंगे। इसमें 10 लाख दीये राज्य सरकार की ओर से, जबकि बाकी दीप घाटों की स्थानीय समितियों द्वारा जलाए जाएंगे। यह प्रकाश उत्सव घाटों को दिव्यता और सौंदर्य से भर देगा, जिससे गंगा तट और पूरे शहर का दृश्य भक्तों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जायेगा।
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काशी के गंगा तट केवल दीपों से नहीं, बल्कि आकाश तक फैली रोशनी से भी जगमगाने वाले हैं। लगभग डेढ़ किलोमीटर के क्षेत्र में 10 मिनट तक चलने वाला शानदार फायर क्रैकर्स शो 200 मीटर ऊंचाई तक रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरेगा, जो देखने वालों के लिए अलौकिक अनुभव प्रदान करेगा। यह शो ग्रीन फायर क्रैकर्स (पर्यावरण-अनुकूल आतिशबाजी), तकनीक और कंप्यूटर आधारित कोरियोग्राफी के साथ तैयार किया गया है। अंतरराष्टï्रीय स्तर के मानकों को पूरा करता यह अद्भुत नजारा काशी की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम देगा।
देव दीपावली को लेकर गंगा घाटों की साफ-सफाई व सौंदर्यीकरण का काम तेजी से चल रहा है। 5 नवंबर को होने वाली देव दीपावली से पहले 1 से 4 नवंबर तक गंगा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय कलाकार प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से काशी की परंपरा और कला की झलक देखने को मिलेगी।
