UP News: इको गार्डन में NHM कर्मचारियों का आंदोलन तेज, तीसरे दिन CHO ने खून से पत्र लिखकर उठाई नियमितीकरण की मांग

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारियों का आंदोलन तीसरे दिन और उग्र हो गया। लखनऊ के इको गार्डन में संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर के हजारों स्वास्थ्य कर्मी धरने पर डटे रहे। आंदोलन के तीसरे दिन एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) ने अपने खून से पत्र लिखकर शासन तक अपनी पीड़ा और मांगें पहुंचाईं।
प्रदर्शनकारियों ने ‘समान कार्य-समान वेतन’ और नियमितीकरण की मांग को लेकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि जब तक ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
समिति की 5 मुख्य मांगें
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समान कार्य-समान वेतन: एनएचएम कर्मियों के लिए पारदर्शी वेतन नीति लागू हो। ग्रेड-पे और कार्य अनुभव के आधार पर मासिक वेतन व वेतन वृद्धि तय की जाए।
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नियमितीकरण: वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मियों को राज्य की नियमित स्वास्थ्य व्यवस्था में समायोजित किया जाए। भारत सरकार के पूर्व निर्देशों के आधार पर निर्णय लिया जाए।
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पारदर्शी स्थानांतरण नीति: पारिवारिक और व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए स्थानांतरण नियमों में बदलाव किया जाए।
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सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा: सभी पात्र कर्मियों को ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI), ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिले।
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आउटसोर्स कर्मियों की सेवा सुरक्षा: आउटसोर्स कर्मियों को डीएचएस (DHS) अथवा प्रस्तावित सेवा निगम में समायोजित कर सुरक्षित भविष्य दिया जाए।
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सभी संवर्गों के कर्मी एकजुट
धरने में चिकित्सक, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट, बीपीसीएम, काउंसलर और डेंटल सर्जन सहित कई संवर्गों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

संयुक्त एनएचएम संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल गुप्ता, महामंत्री योगेश उपाध्याय, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अम्मार जाफरी, आरबीएसके से डॉ. आशुतोष उपाध्याय, बीपीसीएम महामंत्री सुरेंद्र पाल, नर्सिंग संवर्ग से हरिओम सिंह, एएनएम संघ की प्रेमलता पाण्डेय, काउंसलर ज्योतिर्मि राय, विजय बाजपेई और कमलेश कश्यप ने धरने को संबोधित किया।

समिति पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने इन कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगी। उन्होंने शासन से तत्काल उच्चस्तरीय वार्ता कर समस्याओं के समयबद्ध समाधान की मांग की।
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