नोएडा डेटा सेंटर में अडानी को बिजली लाइसेंस देने का विरोध
नोएडा डेटा सेंटर में अडानी को बिजली लाइसेंस देने पर उपभोक्ता परिषद का करारा कानूनी हमला, AESSEL की पात्रता पर उठाए गंभीर सवाल

लखनऊ, 16 अक्टूबर : देश के सबसे बड़े उद्योग पति अडानी को उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में इंट्री मिलने में मुश्किलें आ रही हैं। अडानी पावर ने पिछली बार प्रदेश में वितरण लाइसेंस मांगा था जिसे विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय कमियों का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया है। अडानी इस बार नोएडा डाटा सेंटर के लिए लाइसेंस मांग रहा है। कम्पनी को नियमों का दरकिनार करते हुए लाइसेंस न दिया जाए इसके लिए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विरोध शुरू कर दिया है।
नोएडा के सेक्टर-62 स्थित डेटा सेंटर पार्क में अडानी समूह की कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने UPERC के समक्ष जोरदार कानूनी विरोध दर्ज कराया। आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार तथा सदस्य श्री संजय कुमार सिंह और श्री गिरिश कुमार वैश्य की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कंपनी की वित्तीय क्षमता, वैधानिक पात्रता और तकनीकी योजना पर गंभीर सवाल उठाए। अदानी ग्रुप के अनेक ऑन अधिकारियों के अलावा अदानी ग्रुप की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय सेन ने अपनी बात रखी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि बिजली वितरण लाइसेंस किसी बड़े औद्योगिक समूह के नाम या निवेश के दावों के आधार पर नहीं दिया जा सकता। आवेदक कंपनी को कानून की सभी अनिवार्य शर्तें स्वयं पूरी करनी होंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि ₹211.10 करोड़ के प्रस्तावित निवेश और ₹63.33 करोड़ की इक्विटी के लिए वास्तविक पूंजी कहां उपलब्ध है और शेष धनराशि जुटाने के ठोस स्रोत क्या हैं।
परिषद ने यह भी सवाल उठाया कि जब विस्तृत बिजनेस प्लान और नेटवर्क विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण बाद में देने की बात है, तो पूरी वित्तीय एवं तकनीकी व्यवहार्यता जांचे बिना लाइसेंस देने पर विचार कैसे किया जा सकता है। 30 जून 2022 के शासनादेश, 10 मार्च 2023 की सरकारी अधिसूचना और आवेदक कंपनी की स्वतंत्र कानूनी पात्रता की जांच की भी मांग की गई।
बिजली आपूर्ति लागत बढ़ने पर भी परिषद ने जताई चिंता। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार, औसत आपूर्ति लागत वर्ष 2027 में ₹6.53 प्रति यूनिट से बढ़कर वर्ष 2036 में ₹8.23 प्रति यूनिट तक पहुंच सकती है। परिषद ने प्रस्तावित 0.5 प्रतिशत वितरण हानि, 11 केवी नेटवर्क की लागत, बिजली खरीद व्यवस्था तथा NPCL और PVVNL के क्षेत्रों के स्पष्ट सीमांकन की जांच कराने की मांग की, ताकि दूसरे बिजली उपभोक्ताओं पर कोई अनुचित वित्तीय बोझ न पड़े।
AESSEL के पक्ष में प्रस्तुत कानूनी राय पर श्री वर्मा ने कहा कि किसी पक्ष की कानूनी राय आयोग की स्वतंत्र जांच और वैधानिक शर्तों के अनुपालन का विकल्प नहीं हो सकती। आयोग को प्रत्येक आपत्ति और दस्तावेज का निष्पक्ष परीक्षण करना चाहिए।
श्री अवधेश कुमार वर्मा ने स्पष्ट कहा कि उपभोक्ता हितों और वैधानिक शर्तों की अनदेखी कर किसी कंपनी को लाइसेंस देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। परिषद की मांग है कि AESSEL की स्वतंत्र वित्तीय क्षमता, वास्तविक पूंजी, वैधानिक पात्रता, तकनीकी व्यवहार्यता और उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव का पूरा सत्यापन होने तक समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का अंतिम निर्णय न लिया जाए।
अदानी ग्रुप की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय सेन ने अडानी के लाइसेंस को आयोग से देने की सिफारिश करते हुए उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाए गए मुद्दों और आपत्तियों पर एक सप्ताह में आयोग से जवाब देने के लिए समय मांगा अब पूरा मामला उपभोक्ता परिषद की आपत्तियों का जवाब प्राप्त होने के बाद आयोग के पाले में है।
अभियंता संघ और संघर्ष समिति सुनवाई से नदारद
मालूम हो कि कुछ माह पूर्व अभियंता संघ और संघर्ष समिति ने नियामक आयोग को पत्र भेजकर अडानी को डाटा सेंटर का लाइसेंस दिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। दोनों संगठनों ने इसे निजीकरण की पहल मानते हुए आयोग से अपील की थी कि प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र को निजी कम्पनियों के लिए न खोला जाए। आज जब आपत्तियों पर सुनवाई की बारी आई तो संगठन के पदाधिकारी आयोग पहुंचे ही नहीं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब जमीनी स्तर पर निजीकरण का विरोध करना हो और कर्मचारी नेता सामने आए हों। अभियंता संघ और संघर्ष समिति का विरोध केवल बयानबाजी तक ही सीमित है। यही वजह है कि यूपीपीसीएल लगातार निजीकरण के रास्ते पर कदम बढ़ाता जा रहा है। प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र केवल उपभोक्ता परिषद की आपत्तियों और विरोधों के कारण बड़ी निजी उद्योग घरानों के कब्जे में जाने से बचा है।
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