भारत बनेगा दुनिया का AI हब; टेक दिग्गजों ने किया अरबों डॉलर का निवेश, 2 करोड़ युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग

नई दिल्ली | नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026’ भारत के तकनीकी इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और क्वालकॉम जैसी वैश्विक कंपनियों ने भारत के एआई ईकोसिस्टम को बदलने के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है। समिट का मुख्य उद्देश्य ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के मंत्र के साथ एआई को जन-जन तक पहुँचाना है।
🚀 मुख्य घोषणाएं: किसने क्या दिया?
दिग्गज कंपनियों ने न केवल वित्तीय निवेश किया है, बल्कि भारत के कार्यबल (workforce) को भविष्य के लिए तैयार करने का संकल्प भी लिया है:
| Microsoft | $17.5 बिलियन (₹1.5 लाख करोड़) | भारत में क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार। |
| Google | 2 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग | सरकारी कर्मचारियों और छात्रों को एआई कौशल प्रदान करना। |
| Nvidia | AI फैक्ट्री की स्थापना | भारत में सॉवरेन एआई और जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण। |
| Qualcomm | $150 मिलियन फंड | एआई आधारित भारतीय स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना। |
🎓 2 करोड़ युवाओं का भविष्य और स्किलिंग
समिट का सबसे बड़ा आकर्षण स्किलिंग प्रोग्राम रहा। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने घोषणा की कि कंपनी 2 करोड़ भारतीयों को एआई की ट्रेनिंग देगी। इसमें सरकारी कर्मचारी और छात्र शामिल हैं।
माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य: कंपनी ने 2030 तक 2 करोड़ भारतीयों को एआई कौशल से लैस करने का अपना लक्ष्य दोहराया है।
रोजगार के अवसर: एआई के इस विस्तार से डेटा साइंटिस्ट, एआई इंजीनियर्स और मशीन लर्निंग विशेषज्ञों के लिए लाखों नई नौकरियों के रास्ते खुलेंगे।
🏗️ इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत में लगेगी ‘AI फैक्ट्री’
एनवीडिया (Nvidia) के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने भारत में ‘AI फैक्ट्री’ बनाने की योजना साझा की। इसका मतलब है कि भारत अब केवल एआई का इस्तेमाल नहीं करेगा, बल्कि अपनी भाषा और संस्कृति के अनुरूप एआई मॉडल्स खुद तैयार करेगा।
“भारत के पास डेटा की शक्ति है और अब हमारे पास उसे प्रोसेस करने के लिए दुनिया का सबसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर होगा।” — अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय आईटी मंत्री
🌍 ग्लोबल साउथ का नेतृत्व
यह समिट पहली बार किसी ग्लोबल साउथ (विकासशील देश) में आयोजित हुई है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह एआई के क्षेत्र में केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक लीडर के रूप में उभर रहा है। सरकार ने ₹10,372 करोड़ के ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत स्टार्टअप्स को सस्ती दरों पर कंप्यूटिंग पावर देने की भी पुष्टि की है।
💡 आगे क्या होगा?
इस समिट के बाद उम्मीद की जा रही है कि अगले 2-3 वर्षों में भारत में एआई स्टार्टअप्स की बाढ़ आएगी और कृषि, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।



