KGMU में वित्तीय अनियमितताओं पर वीसी सख्त: टेंडर रिन्यूअल और GeM पोर्टल से खरीद पर दिए कड़े निर्देश

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में निर्माण, यांत्रिक, विद्युत और दवा व अन्य मेडिकल सप्लाई के कांट्रैक्ट को समय पर नवीनीकरण ना करने, और बाजार मूल्य से अधिक रेट में दवाएं व अन्य सामान खरीद कर केजीएमयू को बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान पहुंचाया जा रहा है। केजीएमयू वीसी प्रो. नित्यानंद ने स्वयं इस प्रकार की वित्तीय गड़बडि़यां पकड़ी हैं। वीसी ने इन वित्तयी गड़बडि़यों को लेकर नाराजगी जताई और वित्त अधिकारी (Finance Officer) को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
केजीएमयू वीसी की ओर से वित्त अधिकारी को भेजे गए पत्र के सामने आने के बाद टेंडर प्रक्रिया और खरीद फरोख्त से जुड़े कर्मचारियाें, अधिकारियों में हड़कम्प मच गया है।
अनुबंधों के नवीनीकरण में देरी पर नाराजगी
कुलपति ने टेंडर और अनुबंधों की लेट-लतीफी पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि निर्माण, विद्युत, यांत्रिक, और औषधियां क्रय से जुड़े कई अनुबंध समय पर रिन्यू नहीं हो रहे हैं। उपकरणों के वार्षिक अनुरक्षण (AMC/CMC) के प्रस्ताव भी पुराने अनुबंध की समाप्ति के बाद प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
इसके परिणामस्वरूप पुराने ठेकों को मजबूरी में विस्तार (Extension) देना पड़ता है। यह विस्तार कई बार लंबी अवधि तक चलता रहता है। केजीएमयू के अधिकारी जानबूझकर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसे खेल कर रहे हैं। केजीएमयू वीसी ने इसको लेकर नाराजगी जताई है।
3 महीने पहले शुरू करनी होगी टेंडर प्रक्रिया
प्रशासनिक खामियों को दूर करने के लिए वीसी ने नई समय-सीमा तय की है। अब सभी अनुबंधों के नवीनीकरण (Renewal) या नई निविदा (New Tender) की प्रक्रिया 3 माह पूर्व शुरू करनी होगी। साथ ही उन्हें तय समय पर पूरा करना होगा।
वीसी इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। वीसी ने कहा है कि भविष्य में किसी भी पुराने अनुबंध को अनावश्यक विस्तार न देना पड़े। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नियमों का सख्ती से पालन न होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
GeM पोर्टल से खरीद में भी धांधली
विश्वविद्यालय (KGMU) में जेम पोर्टल (GeM Portal) के माध्यम से होने वाली खरीद पर भी कुलपति ने कड़ा रुख अपनाया है। वीसी कहा है कि अनुमोदन (Approval) के लिए आने वाली पत्रावलियों में दर्ज मूल्य तुलनात्मक रूप से अधिक होते हैं।
जबकि सामान्य स्थिति में जेम पोर्टल पर वही सामग्री कम दाम पर उपलब्ध होती है। इसका सीधा सा मतलब है कि केजीएमयू में अधिक कीमतों वाले सामान को अनावश्यक रूप से खरीद कर मरीज हित के लिए आने वाले रूपयों का गबन किया जा रहा है।
वित्त कार्यालय को करना होगा क्रॉस-सत्यापन
अब वित्त अधिकारी को खरीद की सभी पत्रावलियों का अपने स्तर से कड़ाई से परीक्षण करना होगा। कुलपति के पास अनुमोदन के लिए फाइल भेजने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि जेम (GeM) दर न्यूनतम है। परीक्षण के बाद फाइल पर यह स्पष्ट रूप से अंकित करना अनिवार्य होगा। वित्त कार्यालय अपनी जेम आईडी (GeM ID) से इन दरों का क्रॉस-वेरिफिकेशन करेगा और यह प्रमाणित करेगा कि दरें न्यूनतम हैं।
कर्मचारियों, अधिकारियों में हड़कम्प, हो सकती है जांच
VC के दखल के बाद विभागों में, टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। फ़ाइलों की अब और भी बारीकी से जाँच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह पता लगाने के लिए कि किस स्तर पर देरी या गड़बड़ियाँ हुईं, लंबित और पुराने मामलों की भी जाँच की जा सकती है। अगर कोई भी गलत काम साबित होता है, तो इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होने की संभावना है।




