“समता और समान अवसर पर हमला बर्दाश्त नहीं” — यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लेकर पल्लवी पटेल का एलान।

लखनऊ। अपना दल कमेरावादी की शीर्ष नेता एवं सिराथू विधायक डॉ. पल्लवी पटेल ने यूजीसी समता संवर्धन विनियम 2026 को लेकर बड़ा एलान किया है। लखनऊ में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, लिंग, धर्म और अक्षमता के आधार पर बढ़ते भेदभाव व उत्पीड़न को रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत यूजीसी विनियम 2026 लाया गया था, लेकिन इसे जानबूझकर न्यायिक प्रक्रिया में फंसा दिया गया है।

डॉ. पल्लवी पटेल ने आरोप लगाया कि आरएसएस प्रायोजित विरोध के जरिए तथ्यों और तर्कों की बजाय कुतर्कों के सहारे इस विनियम को विवादों में उलझाया गया। उन्होंने कहा कि यह विनियम किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि हर प्रकार के शोषण और शोषणकारी परंपराओं के विरुद्ध है।

उन्होंने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “फूट डालो और राज करो” की नीति के तहत एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ लगातार साजिशें रची जा रही हैं। सरकार शिक्षा, दवाई और कमाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए समाज को अगड़ा-पिछड़ा में बांट रही है।

डॉ. पटेल ने रोहित वेमुला, दर्शन सोलंकी, पायल तडवी और अनिल कुमार जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए यूजीसी विनियम 2026 बेहद जरूरी है, लेकिन इसे जानबूझकर अगड़ा बनाम पिछड़ा की लड़ाई का रूप दिया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब एससी-एसटी-ओबीसी वर्ग के छात्र शांतिपूर्ण ढंग से स्टडी सर्किल और संवाद कार्यक्रम चला रहे थे, तब इलाहाबाद विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में उन पर हमले किए गए। बीएचयू में छात्र आदर्श कुमार पर जानलेवा हमला और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण संवाद कर रहे छात्रों पर हमला इसका उदाहरण है। दोनों मामलों में पुलिस द्वारा क्रॉस एफआईआर दर्ज कर मामले को दबाने का प्रयास किया गया।

डॉ. पल्लवी पटेल ने कहा कि इस दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ अब सड़क पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इसी क्रम में आगामी 10 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस प्रदर्शन में अपना दल कमेरावादी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-नौजवान भी शामिल होंगे।

उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि समता, समान अवसर और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करने के लिए 10 फरवरी को लखनऊ की सड़कों पर उतरें और यूजीसी समता संवर्धन विनियम 2026 को तत्काल लागू कराने की मांग करें।

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