बनवासी परंपरा, लोककल्याण के संकल्प के साथ उमड़ा जनसमूह

लखनऊ/गाजीपुर। नारी पंचदेवरा गांव में बनवासी समाज द्वारा माता शबरी जन्मोत्सव श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना एवं हवन से हुई, जिसके बाद माता शबरी और प्रभु श्रीराम के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
आयोजन में क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और श्रद्धालुओं की भागीदारी रही, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया।
इस अवसर पर यादव महासभा एवं पिछड़ा दलित विकास महासंघ के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बनवासी समाज भारतीय संस्कृति की मूल चेतना का वाहक रहा है, जहां तप, त्याग और भक्ति की परंपरा सदियों से जीवित है।
माता शबरी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में न जाति का बंधन होता है और न ही किसी प्रकार का अहंकार। भक्ति ही शून्य है, भक्ति ही अनंत है और भक्ति ही वह शक्ति है, जहां से समाज में सृजन और परिवर्तन की धारा प्रवाहित होती है। उन्होंने सभी से समाज में आपसी भाईचारा, सेवा और लोककल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में सपा महिला सभा की प्रदेश सचिव एवं सदर विधानसभा प्रभारी पुनीता सिंह (खुशबू) ने माता शबरी के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका त्याग, धैर्य और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि माता शबरी की कथा सामाजिक समरसता और समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने यह सिद्ध किया कि सच्ची श्रद्धा ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में माता शबरी जयंती जैसे आयोजन समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराने का माध्यम बन रहे हैं, जो कि एक सकारात्मक और प्रेरणादायी पहल है।
कार्यक्रम में किसान नेता अमरनाथ यादव, समाजसेवी सिद्धार्थ धरकार, जे.पी. सिंह, यादव महासभा कार्यालय प्रभारी अजय यादव सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने माता शबरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया और समाज में प्रेम, सद्भाव और समानता के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के आयोजक माता शबरी पूजा समिति के सयोजक विस्वास बनवासी थे उन्होंने कहा कि पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और सामूहिक सहभागिता ने इसे एक जनआस्था के उत्सव का रूप दे दिया। क्षेत्र में इस आयोजन की चर्चा पूरे दिन बनी रही और यह कार्यक्रम सामाजिक एकता, आध्यात्मिक जागरण तथा सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरा।
वर्तमान समय में जहां सामाजिक विभाजन की चुनौतियां सामने हैं, वहीं ऐसे आयोजन समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहे हैं और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता रही।




