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BBD: बीबीडी यूनिवर्सिटी में दी गई Basic Life Support की ट्रेनिंग, छात्रों ने सीखा हार्ट अटैक व अन्‍य इमरजेंसी में जान बचाने के उपाय

लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी दिवस के मौके पर बाबू बनारसी दास (BBD) यूनिवर्सिटी में एक विशेष BLS प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में ईएमआरआई ग्रीन हेल्‍थ सर्विसेज (EMRI) के सहयोग से अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) द्वारा मान्यता प्राप्त ‘बेसिक लाइफ सपोर्ट’ (BLS) ट्रेनिंग संपन्न हुई। इस ट्रेनिंग में छात्र छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और आपातकालीन स्थितियों में जीवन बचाने के महत्वपूर्ण तरीके सीखे।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मरियम फरहीन द्वारा की गई। इस मौके पर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. नीता पसरीचा और ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र अरोड़ा ने मुख्य प्रशिक्षकों का स्वागत किया। प्रशिक्षण के लिए आए डॉ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) संदीप बटुला, डॉ. सतीश कुमार और डॉ. दाऊद हुसामी को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया।

डमी पर अभ्यास कर समझीं बारीकियां

ट्रेनिंग सेशन में छात्रों को एएचए के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों तरह की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मैनिकिन (डमी) के जरिए छात्रों को रियल टाइम सिचुएशन का अभ्यास कराया। छात्रों को बताया गया कि कार्डियक अरेस्ट यानी अचानक दिल की धड़कन रुकने पर कैसे पहचान करें और मरीज को तुरंत मदद पहुंचाएं।

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प्रशिक्षण के के दौरान उच्च गुणवत्ता वाली कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन सीपीआर (CPR) विधि और चेस्ट कंप्रेशन (छाती पर दबाव) की सही तकनीक, ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) मशीन को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना की जानकारी दी गई। इसके अलावा सांस रुकने पर कृत्रिम सांस देने का सही तरीका (Rescue breathing), और गले में कुछ फंसने (Choking)पर वयस्कों, बच्चों और शिशुओं को बचाने के लिए अलग-अलग प्राथमिक उपचार के बारे में भी ट्रेनिंग दी गई।

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डॉ. दाउद हुसामी ने कहा कि सही समय और सही तकनीक से दिया गया सीपीआर किसी की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को एएचए मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट दिए गए। छात्रों ने इस वर्कशॉप को बेहद ज्ञानवर्धक बताया और भविष्य में भी ऐसे सत्र आयोजित करने की मांग की।

ईएमआरआई ग्रीन हेल्‍थ सर्विसेज यूपी के डॉ. दाउद हुसामी ने बताया कि हृदय संबंधी बीमारियाँ (CVDs) मृत्यु का एक प्रमुख कारण हैं। भारत में सालाना 7 लाख से अधिक लोग कार्डियक अरेस्ट से अपनी जान गंवाते हैं। मतलब प्रति 1 लाख लोगों में 272 लोगों की जान हर वर्ष कार्डियक अरेस्‍ट के कारण चली जाती है।

लगभग 80% कार्डियक अरेस्ट के मामले अस्पतालों के बाहर (घर पर, कार्यस्थल पर या सार्वजनिक स्थानों पर) होते हैं, और तत्काल सहायता न मिलने के कारण भारत में जीवित रहने की दर 10% से कम है। चूंकि एंबुलेंस तथा हॉस्पिटल पहुंचने में कुछ समय लगता है, इस समय में पीडि़त व्‍यक्ति के मस्तिष्क को स्थायी क्षति पहुंचने की आशंका रहती है।

इसलिए हर व्यक्ति के लिए CPR प्रशिक्षण सीखना महत्वपूर्ण है, भले ही उनका पेशा कुछ भी हो। CPR सीखने से आप अपने परिवार के सदस्य, सहकर्मी या किसी अजनबी का जीवन बचा सकते हैं, क्योंकि हर मिनट कार्डियक अरेस्‍ट से पीडि़त व्‍यक्ति के लिए बिना CPR के बचने की संभावना 10% तक कम होती जाती है।

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