Health

फेफड़े के कैंसर से जूझ रहे मरीज को आईपीसी तकनीकी से दी राहत

Lucknow: फेफड़ों की गम्भीर समस्या से जूझ रहे वह मरीज जिनके फेफड़े में बार-बार पानी भर जाता है, उन्हें अब इस समस्या से निजात मिल सकेगी। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के डॉक्टरों ने पहली बार इंडवेलिंग प्लूरल कैथेटर-आईपीसी (Indwelling Pleural Catheter) तकनीकी से ऐसी ही दिक्कत के परेशान एक मरीज को राहत दी है।

संस्थान के पल्मोनरी मेडिसीन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अजय कुमार वर्मा (Dr. Ajay Kumar Verma) के नेतृत्व में यह प्रक्रिया की गयी। उन्होंने बताया कि गोंडा निवासी यह मरीज कैंसर से ग्रसित था। उसे बार-बार होने वाले प्लूरल इफ्यूजन (फेफड़ों के आसपास पानी भरना) की समस्या थी। हर 4-5 दिन में उसके फेफड़ों के आसपास जमा द्रव को निकालना पड़ता था, जिससे उसे अस्थायी राहत मिलती थी। बार-बार लखनऊ आकर द्रव निकलवाना उसके लिए अत्यंत कठिन था। साथ ही संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में मरीज की राहत देने के लिए यह प्रक्रिया अपनायी गयी।

डा. वर्मा ने बताया कि यह तकनीक उन मरीजों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है, जिनके फेफड़ों के आसपास बार-बार द्रव जमा हो जाता है और उन्हें लगातार सांस लेने में दिक्कत होती है। आईपीसी तकनीक के तहत फेफड़ों के पास की प्लूरल कैविटी में एक विशेष कैथेटर को स्थापित किया जाता है, जिससे जरूरत पडऩे पर द्रव आसानी से निकाला जा सकता है। इससे मरीज को बार-बार अस्पताल में भर्ती होने या प्रक्रिया कराने की जरूरत नहीं पड़ती। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से संक्रमण का खतरा कम होता है और भविष्य में द्रव बनने की समस्या भी स्थायी रूप से रुक सकती है।

इस प्रक्रिया में एचओडी डॉ. अजय कुमार वर्मा के साथ डॉ. हेमंत कुमार अग्रवाल, डॉ. सागर जैन, डॉ. कनक वर्मा और टीम ने यह प्रक्रिया पूरी की। ओटी टीम में वंदना, मनीष, पिंकी, सुमन, आरती और रामेश्वर की भी अहम भूमिका रही।

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Mahima Tiwari

महिमा तिवारी, द कवरेज में सीनियर पत्रकार हैं। पत्रकारिता में 23 साल का अनुभव रखतीं हैं। वह राजनीति, हेल्थ, लाइफ स्‍टाइल और ह्यूमन एंगल स्टोरीज लिखती हैं। महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर भी लिखना पसंद है।

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