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LPG संकट पर सरकार का बड़ा बयान: गैस की कमी नहीं, लेकिन जनता अपनाए PNG और इंडक्शन जैसे विकल्प

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण भारत में गैस और तेल के आयात पर असर पड़ा है। इस ‘एलपीजी संकट’ के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया है। सरकार ने साफ किया है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर जनता को पैनिक बुकिंग से बचने और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को अपनाने की जरूरत है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की सप्लाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्‍होंने कहा कि देश की सभी रिफाइनरियां अपनी 100% क्षमता पर काम कर रही हैं। घरेलू स्तर पर एलपीजी का उत्पादन करीब 40% तक बढ़ा दिया गया है।

सरकार ने बताया कि रोजाना बुकिंग के आंकड़े काफी बढ़ गए हैं, जिसके कारण गैस वितरण व्यवस्था पर दबाव पड़ा है। जमाखोरी रोकने के लिए शहरी क्षेत्रों में सिलेंडर बुकिंग का वेटिंग पीरियड 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन कर दिया गया है। सरकार ने आम जनता और कमर्शियल उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे एलपीजी पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अन्य विकल्पों की तरफ रुख करें।

मंत्रालय ने सभी राज्यों से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बिछाने को कहा है। जिन इलाकों में पीएनजी लाइन मौजूद है, वहां के लोगों को जल्द से जल्द कनेक्शन लेने की सलाह दी गई है।

मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इंडक्शन कुकटॉप (Induction Cooktop) और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया है।

PNG उपभोक्ताओं के लिए लागू हुआ नया नियम

इस संकट को देखते हुए सरकार ने गैस वितरण नियमों में एक बड़ा और सख्त बदलाव किया है:

पेट्रोलियम मंत्रालय के नए आदेश के अनुसार, जिनके घरों में पहले से पीएनजी (PNG) कनेक्शन है, वे अब घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर का उपयोग नहीं कर सकेंगे। ऐसे सभी उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन तुरंत सरेंडर (LPG Surrender) करना होगा। सरकारी तेल कंपनियां अब पीएनजी वाले घरों में सिलेंडर रिफिल नहीं करेंगी।

कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त एक्शन

आपात स्थिति को देखते हुए सरकार ने गैस की जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है।

तेल और गैस वितरण कंपनियों को अपना पूरा डेटा सरकार के साथ साझा करने का आदेश दिया गया है। गैस की कालाबाजारी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए देशभर में 4500 से ज्यादा जगहों पर पुलिस और प्रशासन द्वारा छापेमारी की गई है।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के पास गैस का अकाल (ड्राई आउट) नहीं है। सप्लाई चेन लगातार काम कर रही है, इसलिए घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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