लखनऊ ईको गार्डन में अति पिछड़ा वर्ग को अलग आरक्षण की मांग, कर्पूरी ठाकुर फार्मूला लागू करने की उठी आवाज

लखनऊ: Eco Garden Lucknow में मंगलवार को रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान की ओर से एक विशाल ध्यानाकर्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कर्पूरी ठाकुर फार्मूला लागू कर अति पिछड़े वर्ग (EBC) को ओबीसी आरक्षण के भीतर अलग कोटा देने सहित कई सामाजिक और आर्थिक मांगों को जोरदार तरीके से उठाया गया। कार्यक्रम के बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को संबोधित एक ज्ञापन भी भेजा।
पंचायत चुनाव से पहले अलग आरक्षण की मांग
सभा में वक्ताओं ने कहा कि पंचायत चुनाव से पहले अति पिछड़ा वर्ग को ओबीसी आरक्षण में अलग कोटा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही प्रदेश के सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को तत्काल भरने की मांग भी की गई।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने हैं तो सरकार को पूंजी पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर निवेश बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
किसानों और आदिवासियों के मुद्दे भी उठे
कार्यक्रम में किसानों के लिए *MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की गई। साथ ही जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड लागू करने और कोल जाति को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग भी उठाई गई।
वक्ताओं ने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के कथित शोषण पर रोक लगाने की भी मांग की।
मोदी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सभा में वक्ताओं ने केंद्र की Narendra Modi सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह अब तक की सबसे कमजोर सरकार साबित हुई है। उनका आरोप था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के सामने झुकने की नीति से देश की आर्थिक संप्रभुता को खतरा पैदा हो रहा है।
कई संगठनों के नेताओं ने किया संबोधित
कार्यक्रम की अध्यक्षता एस.आर. दारापुरी ने की, जबकि संचालन अभियान के संयोजक और राष्ट्रीय उदय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूराम पाल ने किया।
सभा को अखिलेन्द्र प्रताप सिंह, केवट रामधनी बिंद, पंडित शेखर दीक्षित, श्रवण कुमार निराला, एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर, राजेश सचान, इंजीनियर रामकृष्ण बैगा और डॉ. बृज बिहारी समेत कई सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि अति पिछड़ा समाज, महिलाएं, दलित, आदिवासी और पसमांदा मुसलमान आज भी सामाजिक-आर्थिक रूप से हाशिए पर हैं। ऐसे में इन वर्गों को प्रतिनिधित्व और संसाधनों में उचित भागीदारी देना समय की मांग है।




