ReligionUP

‘गाय को राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग तेज — मौन व्रत में नैमिषारण्य पहुंचे शंकराचार्य

नैमिषारण्य | सीतापुर: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सोमवार को पवित्र तीर्थ नैमिषारण्य पहुंचे। खास बात यह रही कि वे यहां मौन व्रत के साथ पहुंचे और पूरे समय साधना एवं धार्मिक अनुष्ठानों में लीन रहे। उनके आगमन से तीर्थ क्षेत्र में श्रद्धालुओं और संतों का उत्साह बढ़ गया।

धर्मसभा में उठी बड़ी मांग

शंकराचार्य के सानिध्य में आयोजित धर्मसभा में संतों और शिष्यों ने गौरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और सरकार से गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग दोहराई। साथ ही आने वाले समय में लखनऊ में होने वाली धर्मसभा में बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया।

पौराणिक महत्व पर जोर

सभा में वक्ताओं ने कहा कि नैमिषारण्य को ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और ज्ञान की धरती माना जाता है। कई धार्मिक ग्रंथों में इस पवित्र क्षेत्र का उल्लेख मिलता है और यहां आने वाला हर व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार पुण्य अर्जित करता है।

मंदिर दर्शन और आरती में भागीदारी

शंकराचार्य ने यहां पहुंचकर सबसे पहले शक्तिपीठ मां ललिता देवी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने पवित्र चक्रतीर्थ पर होने वाली आरती में भी भाग लिया और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।

✨ धर्माचार्यों का कहना है कि भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान अत्यंत पूजनीय है और उसके संरक्षण के लिए समाज को संगठित होकर आवाज उठानी होगी।

 

WhatsApp Channel, Google News और सोशल मीडिया पर फॉलो करें

Shailendra Yadav

शैलेंद्र यादव सीनियर पत्रकार हैं। वह राजनीति, एजूकेशन, हेल्थ, लाइफ स्‍टाइल और ह्यूमन एंगल स्टोरीज लिखते हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग और दिलचस्प कहानियां भी लिखते हैं। पत्रकारिता में 12 साल का अनुभव है। करियर की शुरुआत सीतापुर लाइव न्यूज. इसके बाद विभिन्‍न पत्र पत्रिकाओं में काम किया है।

Related Articles

Back to top button