Health

तीन साल में खसरे के 40 प्रतिशत केस बढ़े

पांच साल से कम उम्र के 1.56 करोड़ बच्चे हुए संक्रमित, 1.18 लाख की मौत

लखनऊ। कोरोना महामारी के दौरान नियमित टीकाकरण में आई बाधा का असर बच्चों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में खसरे के मामले तेजी से बढ़े हैं। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल नेचर मेडिसिन में 21 अक्टूबर को प्रकाशित ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GDB) अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2019 में खसरे के अनुमानित मामले 1.11 करोड़ थे, जो 2023 में बढ़कर 1.56 करोड़ हो गए। यानी तीन साल में मामलों में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि में खसरे से होने वाली मौतें भी लगभग 12 प्रतिशत बढ़ीं और 2023 में करीब 1.18 लाख बच्चों की जान चली गई। अध्ययन में 204 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

हर पांच में से एक शिशु को नहीं मिली पहली खुराक

अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2023 में दुनिया भर में करीब 2.37 करोड़ शिशुओं को खसरे के टीके की पहली खुराक नहीं मिल सकी। इनमें लगभग 20 प्रतिशत बच्चे दक्षिण एशिया के थे। विशेषज्ञों ने नियमित टीकाकरण व्यवस्था को मजबूत करने और किसी कारण से टीके से वंचित रह गए बच्चों तक पहुंच बनाने पर जोर दिया है। खसरा अत्यधिक संक्रामक बीमारी है और टीकाकरण में कमी होने पर इसके तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

दूसरी खुराक अभी भी चुनौती

भारत में खसरे के टीकाकरण को लेकर सकारात्मक बदलाव भी सामने आया है। हालांकि, टीकाकरण की दूसरी खुराक को लेकर अभी भी चुनौती बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ के जुलाई 2026 में जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2001 के बाद पहली बार भारत खसरे का टीका नहीं पाने वाले बच्चों की सर्वाधिक संख्या वाले शीर्ष 10 देशों की सूची से बाहर हुआ है।
आंकड़ों के अनुसार, खसरे के टीके की दूसरी खुराक का कवरेज 71.8 प्रतिशत है, जबकि खसरे के प्रकोप को रोकने के लिए दोनों खुराकों का कवरेज करीब 95 प्रतिशत तक पहुंचना जरूरी माना जाता है। शहरी बस्तियों, प्रवासी परिवारों और दूरदराज के गांवों में रहने वाले बच्चों तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती है। इन क्षेत्रों में कई बच्चे नियमित टीकाकरण से छूट जाते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।

काली खांसी भी बच्चों के लिए गंभीर खतरा

नेचर मेडिसिन में इसी दिन प्रकाशित एक अन्य जीबीडी अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2023 में दुनियाभर में काली खांसी के करीब 1.89 करोड़ मामले सामने आए और लगभग 1.15 लाख लोगों की मौत हुई। भारत में 1990 से 2023 के बीच इस बीमारी से मृत्यु दर में लगभग 85 प्रतिशत की कमी आई है। इसके बावजूद एक से पांच महीने की उम्र के शिशुओं में मौत का खतरा अधिक बना रहता है। इस उम्र में बच्चों का टीकाकरण पूरा नहीं हुआ होता, जिससे वे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील रहते हैं।

अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान

खसरा-रूबेला (MR) टीका: बच्चे को पहली खुराक 9 से 12 महीने और दूसरी खुराक 16 से 24 महीने की उम्र में जरूर लगवाएं।

काली खांसी से बचाव: डीपीटी युक्त टीके की खुराकें निर्धारित समय पर दिलाएं और बूस्टर खुराकें भी पूरी कराएं।

टीकाकरण कार्ड रखें: बच्चे को कौन-सा टीका कब लगा, इसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। कोई खुराक छूटने पर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

लक्षणों को नजरअंदाज न करें: तेज बुखार के साथ शरीर पर दाने निकलने या लगातार खांसी के दौरे पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें। सांस लेने में परेशानी, होंठ नीले पड़ने या अत्यधिक सुस्ती की स्थिति में तुरंत अस्पताल ले जाएं।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित टीकाकरण के तहत ये टीके निःशुल्क उपलब्ध हैं। समय पर टीकाकरण कराकर बच्चों को गंभीर संक्रामक बीमारियों से बचाया जा सकता है।

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Mahima Tiwari

महिमा तिवारी, द कवरेज में सीनियर पत्रकार हैं। पत्रकारिता में 23 साल का अनुभव रखतीं हैं। वह राजनीति, हेल्थ, लाइफ स्‍टाइल और ह्यूमन एंगल स्टोरीज लिखती हैं। महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर भी लिखना पसंद है।

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