KGMU: स्तन कैंसर से जंग, महिलाओं ने तोड़ी चुप्पी, सही समय पर इलाज से कैंसर को हराया और स्तन भी बचाया

लखनऊ। स्तन में गांठ महसूस होने पर अब महिलाएं चुप्पी तोड़ रही हैं। वे शर्म और झिझक छोड़कर अपनी परेशानी परिवार और डॉक्टरों से साझा कर रही हैं। केजीएमयू (KGMU) के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में आयोजित स्तन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में इसकी सुखद तस्वीर देखने को मिली।

समय पर अस्पताल पहुंचने से कई महिलाओं ने स्तन कैंसर को सफलतापूर्वक मात दी है। शुरुआती अवस्था में ही अस्पताल पहुंचने का मरीजों को दोहरा लाभ मिला। सही समय पर इलाज शुरू होने से न सिर्फ जानलेवा बीमारी पर काबू पाया गया, बल्कि सर्जरी के दौरान कई महिलाओं के स्तन को भी सुरक्षित बचा लिया गया। कार्यक्रम में ऐसी ही कुछ विजेता महिलाओं ने अपनी कहानी साझा की।
पूजा ने समझदारी से हराया कैंसर को
पूजा को जैसे ही अपने स्तन में गांठ महसूस हुई, उन्होंने बिना कोई देरी किए परिवार को बताया। परिजन तुरंत उन्हें केजीएमयू के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग लेकर पहुंचे। यहां डॉ. नसीम अख्तर ने उनकी जांच की और स्तन कैंसर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने इलाज की रणनीति बनाते हुए पहले उन्हें कीमोथेरेपी दी। इसके बाद ऑपरेशन कर गांठ को सुरक्षित निकाल दिया। इस केस की सबसे खास बात यह रही कि कैंसरग्रस्त गांठ निकालने के साथ ही डॉक्टरों ने पूजा के स्तन को भी बचा लिया। शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने के कारण ही यह संभव हो सका।
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पूनम का हौसला: आखिरी स्टेज से लड़कर जीती जिंदगी
पूनम बाला की कहानी उन सभी के लिए मिसाल है जो कैंसर का नाम सुनकर हार मान लेते हैं। वर्ष 2012 में पूनम को स्तन में गांठ महसूस हुई थी। शुरुआत में उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वे घरेलू नुस्खों के भरोसे रहीं, जिससे बीमारी शरीर में फैलती चली गई।
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जब हालत बिगड़ी, तब वह केजीएमयू पहुंचीं। जांच में पता चला कि कैंसर स्तन से निकलकर लिवर और स्प्लीन (तिल्ली) समेत दूसरे अंगों तक फैल चुका है। यह खबर उनके लिए एक बड़ा झटका थी, लेकिन पूनम ने हिम्मत नहीं हारी। परिवार ने पूरा साथ दिया। डॉक्टरों ने कीमोथेरेपी और सर्जरी के जरिए उनका इलाज किया। आज पूनम पूरी तरह स्वस्थ हैं और मानती हैं कि यह सफर उनकी हिम्मत और उम्मीद की जीत है।
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