
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) ने फॉरेंसिक विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केजीएमयू के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग में नई ‘डीएनए फिंगरप्रिंटिंग प्रयोगशाला’ की शुरुआत की गई है। शुक्रवार को केजीएमयू की कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इस अत्याधुनिक लैब का उद्घाटन किया। इसके साथ ही फॉरेंसिक डीएनए प्रोफाइलिंग पर दो दिवसीय (23-24 अक्टूबर) व्यावहारिक कार्यशाला भी शुरू हो गई है।
चिकित्सा और फॉरेंसिक विज्ञान का अहम समन्वय
उद्घाटन समारोह में कुलपति प्रो. डॉ. सोनिया नित्यानंद ने लैब की भविष्य की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा अनुसंधान और आणविक निदान में डीएनए आधारित तकनीकों का उपयोग तेजी से विकसित किया जाएगा। इसमें बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Bone Marrow Transplant) के बाद काइमेरिज्म विश्लेषण जैसी महत्वपूर्ण जांचें भी शामिल होंगी।

अज्ञात शवों की पहचान और आपराधिक मामलों में मिलेगी मदद
फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. डॉ. अनूप कुमार वर्मा ने लैब के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि डीएनए प्रोफाइलिंग आधुनिक फॉरेंसिक जांच का एक बेहद अहम वैज्ञानिक उपकरण है। इस लैब की मदद से अज्ञात शवों, लापता व्यक्तियों और आपदा पीड़ितों की पहचान आसानी से हो सकेगी। इसके अलावा, पितृत्व निर्धारण (Paternity Test) और अस्पतालों में नवजात शिशुओं की अदला-बदली जैसे संवेदनशील मामलों को सुलझाने में भी यह लैब मील का पत्थर साबित होगी। प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित होने से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित मामलों के निस्तारण में भी तेजी आएगी।
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कैंसर और न्यूरोलॉजिकल विकारों के टेस्ट की भी योजना
फोरेंसिक फिंगर प्रिंटिंग यूनिट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंशु प्रिया ने भविष्य की कार्ययोजना साझा की। उन्होंने बताया कि यह लैब मुख्य रूप से तीन दिशाओं में काम करेगी- अनुसंधान, शिक्षा व प्रशिक्षण, और एसटीआर (STR) आधारित आणविक निदान। भविष्य में यहां कैंसर में माइक्रोसैटेलाइट अस्थिरता परीक्षण और कुछ न्यूरोलॉजिकल विकारों के लिए रिपीट-एक्सपेंशन परीक्षण जैसी उच्च स्तरीय जांचें भी विकसित की जा सकेंगी।
विशेषज्ञों ने साझा किए डीएनए जांच के गुर
इस दो दिवसीय कार्यशाला में यूपी और अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के शोधार्थी, शिक्षक और फॉरेंसिक विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। इन्हें डीएनए निष्कर्षण, पीसीआर प्रवर्धन, एसटीआर प्रोफाइलिंग और जेनेटिक एनालाइजर द्वारा डीएनए प्रोफाइल की व्याख्या का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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कार्यशाला में जबलपुर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के डॉ. पंकज श्रीवास्तव, बीएचयू के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और झारखंड एफएसएल के डॉ. ज्वाला कुमार नंद जैसे विशेषज्ञों ने डीएनए जांच के विभिन्न पहलुओं और मानव आबादी के आनुवंशिक इतिहास पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रो. विमला वेंकटेश ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मशूमी सिंह ने प्रस्तुत किया।
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