चीफ ने अधीक्षण अभियंता से खाली करा लिया कमरा

Lucknow: लेसा सेन्ट्रल जोन के अधीक्षण अभियंता(Superintending Engineer) कामर्शियल मुकेश त्यागी को हुसैनगंज कार्यालय में एक कमरा आवंटित किया गया। उनके बैठने के लिए कमरे को बकायदा रंग रोगन करके सजाया गया। कुर्सी मेज व कम्प्यूटर आदि सबकुछ लग गया मगर एसई साहब कमरे में अधिक दिन बैठ नहीं पाए। करीब दो माह बाद ही चीफ इंजीनियर रवि अग्रवाल को मुकेश त्यागी का कमरा अच्छा लगने लगा और चीफ ने अधीक्षण अभियंता से कमरा खाली करा लिया।
मुख्य अभियंता (Chief Engineer) लेसा सेन्ट्रल जोन रवि अग्रवाल का आलीशान कार्यालय हुसैनाबाद घंटाघर के निकट बना हुआ है। सेन्ट्रल जोन बनने से पहले वहां अधीक्षण अभियंता अष्टïम बैठा करते थे मगर बाद में दफ्तर का सुन्दरीकरण कराकर उसे मुख्य अभियंता कार्यालय बना दिया गया। वहां बैठने वाले अधीक्षण अभियंता अष्टïम को नींबू पार्क में बने कार्यालय के दूसरे तल पर कमरा दे दिया गया। अब लेसा में वर्टिकल व्यवस्था लागू हो चुकी है।
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वर्टिकल व्यवस्था में हुसैनगंज में कस्टमर केयर 1912 को दिया गया स्थान खाली कराकर वहां अधीक्षण अभियंता वाणिज्य और अधिशासी अभियंता कलेक्शन का कार्यालय बनाया गया था। अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात मुकेश त्यागी को वाणिज्य का कार्यभार मिला और हुसैनगंज में बनी इमारत में कमरा आवंटित किया गया। कार्यालय बना और मुकेश त्यागी वहां बैठकर अपना काम भी करने लगे। मगर यह चीफ इंजीनियर को रास नहीं आया।
मार्च बीतने के साथ ही चीफ ने मुकेश त्यागी को निर्देश दिया कि वह कमरा खाली कर दें। श्री त्यागी ने चुपचाप कमरा खाली कर दिया। करीब चार दिन तक वह उसी इमारत में ऊपर बने छोटे से कमरे में बैठने भी लगे। कमरे के बाहर उनकी नेम प्लेट लग गई। चीफ इंजीनियर को यह भी अच्छा नहीं लगा तो उन्होंने अधीक्षण अभियंता को उस भवन के बजाय सामने बने दूसरे भवन में जाने का निर्देश सुना दिया। इस बार भी एसई मुकेश त्यागी चीफ के इस आदेश पर आपत्ति नहीं जता पाए। और कमरा खाली करके नए दफ्तर में चले गए। हालांकि उनका पूरा स्टाफ अभी भी पुरानी इमारत में ही बैठ रहा है।
रोजाना करते हैं रजिस्टर की जांच
चीफ इंजीनियर रवि अग्रवाल की वर्किंग ऐसी है कि वह रोजाना एक चक्कर तो कलेक्शन कार्यालय में लगा ही लेते हैं। कर्मियों का कहना है कि चीफ साहब कार्यालय आने पर रजिस्टर जरूर चेक करते हैं। उसमें भी उनकी निगाह बहुमंजिला इमारतों में कनेक्शन के लिए आने वाली फाइलों पर रहती है। कर्मचारी बताते हैं कि चीफ सभी प्रोसेसिंग के बारे में जानकारी लेते हैं कि और यह पता लगाते है कि कौन सी फाइल किस एसडीओ और जेई को रिपोर्ट के लिए दी गई है। इसके पीछे का कारण कर्मचारी नहीं बता पाते मगर उनके रोजाना कार्यालय आने से सब परेशान जरूर है। कर्मियों का कहना है कि चीफ के कार्यालय आने के बाद सभी अधिकारियों को बुला लेते हैं और मीटिंग शुरू कर देते हैं जो दो घंटे तक चलती है। इस दौरान उपभोक्ता सेवाएं प्रभावित हो जाती हैं।
मीटिंग से नहीं मिल रहा आउटपुट
सेन्ट्रल जोन के मुख्य अभियंता रोजाना करीब दो घंटे मीटिंग करते हैं। ऑनलाइन मीटिंग में जेई से लेकर अधिशासी अभियंता तक शामिल होते हैं। उस दौरान चीफ इंजीनियर इंजीनियरों को केवल फटकारते और निलम्बित करने की चेतावनी देते हैं। सोमवार को दोपहर बाद मीटिंग में चीफ इंजीनियर ने 11केवी एलटी में तैनात एक महिला कर्मी को केवल इस लिए सस्पेंड करने का निर्देश दिया क्योंकि वह ये नहीं बता सकी कि जोन में अधिक भार वाले 5 फीडर कौन से हैं।
अवर अभियंताओं का कहना है कि काम कराने के लिए बिजली उपकेन्द्र एक टाइम में एक गैंग ही है। अनुरक्षण के लिए समय पर विद्युत सामग्री नहीं मिल रही और चीफ सप्लाई बहाल रखने की बात करते हैं। सप्लाई बंद होने पर निलम्बन की धमकी देते हैं। धमकाने के बजाय अगर मीटिंग में इस बात पर चर्चा हो कि मैन पावर को कैसे बढ़ाया जा सकता है तो शायद बैठक का कुछ आउटपुट निकले।




