45 मिनट में पास हुआ ₹5179 करोड़ का बजट: लखनऊ नगर निगम में बिना चर्चा ‘विकास’ पर मुहर, विपक्ष ने उठाए सवाल

लखनऊ: लखनऊ नगर निगम के इतिहास में रविवार, 22 मार्च को सबसे छोटा सदन देखने को मिला, जो मात्र 45 मिनट में ही समाप्त हो गया। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का ₹5179.71 करोड़ का बजट सिर्फ 30 मिनट में पढ़कर बिना किसी चर्चा के पास कर दिया गया, जिसे लेकर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है।
बजट की मुख्य बातें:
- कुल बजट: ₹5179.71 करोड़
- विकास कार्यों के लिए: ₹4692.71 करोड़
- जलकल व सीवर कार्य: ₹487 करोड़
- सफाई व कूड़ा प्रबंधन: ₹400 करोड़ से अधिक
- सड़क निर्माण: ₹271 करोड़
- हाउस टैक्स लक्ष्य: ₹750 करोड़
नगर निगम ने साफ-सफाई, कूड़ा निस्तारण, श्मशान घाटों के सौंदर्यीकरण और शहर को डिजिटल बनाने पर खास जोर दिया है। राहत की बात यह रही कि जनता पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। साथ ही जून तक समय पर कर जमा करने पर छूट भी दी जाएगी।
विकास योजनाएं:
बजट में नई उत्सव वाटिकाओं का निर्माण, कल्याण मंडप, मूलभूत सुविधाओं का सुधार और शहरी ढांचे को मजबूत करने की योजनाएं शामिल हैं।
- मेयर विकास निधि: ₹20 करोड़
- नगर आयुक्त निधि: ₹10 करोड़
- पार्षद निधि: यथावत
आय के स्रोत:
- ₹2278 करोड़: राजस्व लेखा (टैक्स, लीज रेंट, जुर्माना आदि)
- ₹981 करोड़: कैपिटल अकाउंट (केंद्र/राज्य योजनाएं जैसे अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन आदि)
विपक्ष का हमला:
विपक्ष ने बजट को “जनविरोधी” बताते हुए कहा कि बिना चर्चा पास करना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
- ऑफलाइन गृहकर जमा पर छूट में कटौती को दुर्भाग्यपूर्ण बताया
- विकास कार्यों में पर्याप्त बढ़ोतरी न होने का आरोप
- मात्र 30 मिनट में बजट पढ़कर पास कराने पर सवाल
विपक्ष का कहना है कि सदन में एक मिनट की भी चर्चा न होना चौंकाने वाला है और यह सत्ता पक्ष के “अहंकार” को दर्शाता है।
जहां एक ओर नगर निगम इस बजट को विकास और सुविधा केंद्रित बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे बिना बहस का ‘औपचारिक बजट’ करार दे रहा है। अब देखना होगा कि यह बजट जमीन पर कितना असर दिखाता है।




