अब घर पर ही होगा इलाज: MP के बुजुर्गों के लिए संजीवनी बनी ‘HOPE’ योजना, 6 जिलों में शुरुआत

BHOPAL: मध्य प्रदेश के उन हजारों बुजुर्गों के लिए राहत भरी खबर है, जो बीमारी या अधिक उम्र के कारण बिस्तर पर हैं और जिनका अस्पताल तक जाना किसी पहाड़ चढ़ने जैसा होता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने प्रदेश में एक नई पहल ‘HOPE’ (Home-based care program for the elderly) की शुरुआत की है। इस योजना का मकसद साफ है—जो बुजुर्ग अस्पताल नहीं आ सकते, अब अस्पताल (इलाज) उनके घर तक पहुंचेगा।

क्या है ‘HOPE’ योजना?

‘HOPE’ यानी ‘होम बेस्ड केयर प्रोग्राम फॉर एल्डरली’। यह योजना विशेष रूप से उन वृद्धजनों के लिए डिजाइन की गई है जो लकवा, ऑपरेशन के बाद की कमजोरी, गंभीर बीमारी या मेंटल हेल्थ जैसी समस्याओं के कारण चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। ऐसे बुजुर्गों की दुनिया अक्सर घर की चार दीवारों तक सिमट कर रह जाती है, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें उनके घर का दरवाजा खटखटाएंगी।

शुरुआत में इन 6 जिलों को मिला लाभ

फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रदेश के 6 प्रमुख शहरों में शुरू किया गया है। इनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा शामिल हैं। इन जिलों के शहरी क्षेत्रों में योजना लागू हो चुकी है और अब तक ‘होप ऐप’ पर 1200 से अधिक बुजुर्गों का रजिस्ट्रेशन भी किया जा चुका है।

कैसे काम करेगी यह पूरी व्यवस्था?

  1. सबसे पहले आशा कार्यकर्ता (ASHA Workers) घर-घर जाकर सर्वे करेंगी।

  2. शहरी स्वास्थ्य केंद्र के नर्सिंग ऑफिसर ऐसे जरूरतमंद बुजुर्गों का चयन कर उनकी जानकारी ‘होप ऐप’ (Hope App) में दर्ज करेंगे।

  3. इसके बाद नर्सिंग ऑफिसर ‘होप किट’ (Hope Kit) लेकर बुजुर्ग के घर जाएंगे। इस किट में बीपी मशीन, ग्लूकोमीटर, वेइंग मशीन जैसे जरूरी उपकरण होंगे।

  4. फॉलोअप: मरीज का बीपी, शुगर और वजन चेक करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपी और मानसिक स्वास्थ्य सहायता भी दी जाएगी। गंभीर मामलों में टेली-मानस (Tele-Manas) के जरिए डॉक्टर्स से भी जोड़ा जाएगा।

परिवार वालों को भी दी जाएगी ट्रेनिंग

इस योजना की एक खास बात यह भी है कि इसमें सिर्फ इलाज नहीं होगा, बल्कि ‘ट्रेनिंग’ भी होगी। नर्सिंग स्टाफ घर के सदस्यों को सिखाएंगे कि बुजुर्ग मरीज की देखभाल सही तरीके से कैसे करनी है, ताकि इलाज में निरंतरता बनी रहे।

एनएचएम की एमडी डॉ. सलोनी सिडाना के अनुसार, यह योजना उन बुजुर्गों के लिए नई उम्मीद है जो बीमारी के कारण लाचार हैं। प्रदेश में बढ़ती बुजुर्ग आबादी को देखते हुए यह कदम भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

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