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पंजाब में ‘अछूत’ से ‘विकल्प’ बनने की राह पर भाजपा

2024 के लोकसभा चुनाव में 23 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त और जट्ट सिखों के बीच बढ़ता वोट शेयर केवल चुनावी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि पंजाब के बदलते सामाजिक-राजनीतिक मिजाज का संकेत हैं।जमीनी रुझान बताते हैं कि यह दायरा लगातार बढ़ रहा है।

पंजाब में भाजपा अब सिक्खों के लिए अछूत पार्टी नहीं है, 2024 में जहां 5% जट्ट सिक्खों का वोट भाजपा को आया था, वहीँ इस बार यह संख्या 10% से कम नहीं रहने वाली।

मैंने  पहले भी लिखा है कि 2024 के निराशाजनक चुनाव में भी भाजपा 23 विधानसभा सीटों पर नंबर वन रही , इसी प्रकार 8 सीटें ऐसी हैं जहां पर भाजपा 5000 से कम मतों के अंतर से दूसरे या तीसरे स्थान पर रही।

स्पष्ट है कि 117 विधानसभा सीट वाले पंजाब में 31 सीट 2024 में ही ऐसी थी जहां भाजपा लड़ाई में है और तब से लेकर अब तक लगातार आम आदमी पार्टी का ताप लगातार घट ही रहा है। दिल्ली में हार के बाद आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने जिस तरह से पंजाब में जाकर “वहाँ की सरकार पर कब्जा करने की कोशिश की है, उससे चीजें और खराब हुई हैं। सत्ता की तलब बहुत बुरी होती है, यही केजरीवाल के साथ हुआ है। हार के बाद दिल्ली में जमे रहकर मेहनत करनी थी तो उसके बजाय पंजाब में सुपर CM बनने का प्लान बना लिया गया।

अब उसी तलब में रातों रात कॉकरोच जनता पार्टी खड़ी की गई। कॉकरोच के पीछे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों खड़े हैं लेकिन समस्या तब खड़ी होती है जब इन दोनों को चुनाव एक दूसरे के खिलाफ लड़ना है। दोनों मिलकर प्रयास में हैं कि पंजाब के खालिस्तानी तत्वों को खुश किया जाये और उसका सबसे आसान तरीका है दिल्ली को घेर लेना।

यह अहसास पैदा करना कि दिल्ली की सत्ता परेशान है, शासन करने में फिसलन महसूस हो रही है। परंतु पंजाब में खालिस्तानी तत्व भले ही हावी 75% जगहों पर हों किन्तु वोट उनके पास 20-25% ही है। हां, ये लोग साथ में 15-20% आबादी को और प्रभावित करने का दम रखते हैं तो भी यह बहुसंख्यक नहीं हो पा रहे हैं।

दूसरी तरफ संघ भाजपा और खालिस्तान समर्थकों के बीच लगभग 4 दशक से खेल जारी है कि कौन पहले पलक झपकाता है। संघ भाजपा कसम लेकर बैठे हैं कि खालिस्तानी चाहे जो करें हम उन्हें सिक्खों का प्रतिनिधि नहीं मानेंगे और इस कारण उनके हरकतों और घृणा के घनघोर प्रदर्शन के बावजूद सिक्ख समाज, सिक्ख गुरु, सिक्ख दर्शन को अपना मानते रहेंगे जबकि खालिस्तानी चाहते हैं कि हम संघ और भाजपा को इतना गाली देंगे कि कांग्रेस की तरह ये भी प्रतिकार (Retaliate) करने को मजबूर हो जाएंगे और कुछ न कुछ सिक्ख विरोधी हिंसा करने के लिए आगे बढ़ जाएंगे।

फ़िलहाल धैर्य के इस खेल में नरेंद्र मोदी से बड़ा खिलाड़ी मिलना मुश्किल है, खालिस्तानी उन्हें जितना गाली दे रहे हैं, वह सिक्ख समाज के प्रति उतना ही आदर सत्कार का भाव बढ़ाते जा रहे हैं। भाजपा का प्रत्येक बड़ा नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री आपको सिक्खों के कार्यक्रम में सक्रिय दिखाई देगा। यह खेल 4 दशक से चल रहा है, और खालिस्तानी 4 दशक से अपने लोगों को संघ भाजपा का डर दिखा रहे हैं पर भाजपा सत्ता में भी आ गई पर किया तो केवल अच्छा ही, इसलिए झूठ की उम्र पूरी हो रही है। मुझे केवल एक दशक और की देरी दिखाई पड़ रही है।

खालिस्तानी जेहादियों को अपने लोगों को भ्रमित (brainwash) करने के लिए जो हिंसा और प्रतिरोध चाहिए था, वह भाजपा संघ नहीं दे रहा। किसान आंदोलन के दौरान लालकिले पर हमला उसी हिंसा की चाहत में हुआ था पर तब नहीं मिला तो अब क्या मिलेगा?

धीरे-धीरे स्थिति ऐसी बनती जा रही है कि पंजाब में भी राष्ट्रवाद स्थापित होगा, यह कोई असंभव काम नहीं है। समय लगेगा पर सफलता मिलकर रहेगी। चार दशक की तपस्या पूरी हो गई है, अब अधिकतम एक दशक और…..

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Dr Bhupendra Singh

Writer (The Common Sense), Clinical Hematologist, General Secretary Shri Guru Gorakhnath Sewa Nyas, Nation intellectual cell coordinator @NMOBharat

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