अमेरिकी टैरिफ का उत्तर प्रदेश के 22,000 करोड़ के निर्यात पर सीधा असर, व्यापारियों तलाश रहे विकल्प
कारोबारियों ने निकाला तोड़, यूरोप, रूस, यूके और मिडल ईस्ट में व्यापार विस्तार की तैयारी
अमेरिकी टैरिफ का उत्तर प्रदेश के 22000 करोड़ के निर्यात पर सीधा
LUCKNOW: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। भारत के प्रमुख निर्यात केंद्रों में से एक यूपी इस नीति से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यूपी के कारोबारी, विशेष रूप से कानपुर, आगरा, मुरादाबाद और भदोही जैसे क्लस्टर्स, लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर निर्भर रहे हैं।
अनुमान है कि इस टैरिफ से यूपी के 22,000 करोड़ रुपये के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा, जिसमें अमेरिका को जाने वाले सामानों में 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालांकि, कारोबारी और योगी सरकार नए बाजारों, विशेष रूप से यूरोप की ओर रुख कर रहे हैं, इसका कितना लाभ मिलेगा यह आने वाला समय बताएगा।
लेदर उद्योग सबसे अधिक प्रभावित
यूपी से प्रमुख रूप से फुटवियर, लेदर, कालीन और हैंडीक्राफ्ट निर्यात किया जाता है। अमेरिकी टैरिफ से यूपी के 22,000 करोड़ रुपये के निर्यात पर असर पड़ेगा। अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद ऑर्डर कैंसिलेशन बढ़ गए हैं, और कई उत्पादकों ने अमेरिका को माल भेजना बंद कर दिया है। परिणामस्वरूप, कारोबार का संतुलन बिगड़ गया है, और छोटे-मध्यम उद्यमियों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। अमेरिका को होने वाले निर्यात में 50 प्रतिशत तक की गिरावट की आशंका है।
तात्कालिक रूप से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान (केवल कानपुर और आगरा जैसे क्लस्टर्स में)। लंबे समय में यह आंकड़ा बढ़ सकता है। इन सेक्टर्स में लाखों लोग कार्यरत हैं। ऑर्डर घटने से उत्पादन कम होगा, जिससे बेरोजगारी और आय में कमी की संभावना है। उदाहरण के लिए, कानपुर के लेदर उद्योग में 1.86 लाख लोग कार्यरत हैं, जहां 19 प्रतिशत निर्यात अमेरिका पर निर्भर है।
जानकारी के अनुसार, यूरोप के बाजार पर यूपी के निर्यातकों की नजर है, जहां पिछले वित्तीय वर्ष में 3,500 करोड़ रुपये का निर्यात हो चुका है, और अब इसे बढ़ाने की योजना है।
प्रभावित सेक्टर: विस्तृत विश्लेषण
लेदर और चर्म उत्पाद (Leather Products):
भारत की लेदर कैपिटल कानपुर इससे सबसे अधिक प्रभावित होने की सम्भावना है। पिछले वित्तीय वर्ष में कानपुर से 10,000 करोड़ रुपये का कुल निर्यात हुआ, जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 2,500 करोड़ रुपये थी (इसमें 1,000 करोड़ रुपये केवल लेदर उत्पादों के)। अब 50 प्रतिशत टैरिफ से यह बाजार महंगा हो गया है, जिससे ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं। यूपी के कुल लेदर निर्यात में अमेरिका का 19 प्रतिशत हिस्सा है। जानकारी के अनुसार, यूरोप में जर्मनी (727 करोड़ रुपये का निर्यात) सहित 3,500 करोड़ रुपये का निर्यात पहले से हो रहा है, और निर्यातकों ने अब इसे बढ़ाने की योजना बनाई है।
नए टैरिफ के कारण लगभग 1,000-2,500 करोड़ रुपये का नुकसान। कुल यूपी लेदर निर्यात (2024-25 में 16 हजार करोड़ रुपये) का बड़ा हिस्सा प्रभावित।
फुटवियर (Footwear)
इस सेक्टर में भी सबसे अधिक आगरा और कानपुर प्रभावित हो रहे हैं। आगरा से सालाना 1,200 करोड़ रुपये के फुटवियर और हैंडीक्राफ्ट निर्यात होते हैं, जिसमें आधा (600 करोड़ रुपये) अमेरिका जाता था। टैरिफ से ऑर्डर कैंसिलेशन बढ़े हैं। नई जानकारी के अनुसार, यूरोप के स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आयरलैंड जैसे देशों में निर्यात बढ़ाने की योजना है, जहां भारत-यूरोपियन FTA (1 अक्टूबर से) राहत दे सकता है। इसके कारण करीब 600-1,000 करोड़ रुपये नुकसान होने का अंदेशा है।
कालीन और कार्पेट (Carpets):
टैरिफ का बड़ा असर भदोही पर भी पड़ा है। यूपी का कालीन उद्योग अमेरिकी बाजार पर निर्भर रहा है। टैरिफ के कारण करीब 500-1,000 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान है। जानकारी के अनुसार, यूरोप और मिडल ईस्ट में विस्तार की संभावना पर काम हो रहा है।
हैंडीक्राफ्ट और अन्य हस्तशिल्प (Handicrafts):
आगरा, मुरादाबाद और हाथरस से करीब 1,200 करोड़ रुपये के हैंडीक्राफ्ट निर्यात किया जाता था जिसमें आधा अमेरिका जाता था। टैरिफ के कारण करीब 600 से 1200 करोड़ रूपये का मुनाफा में कमी आने की अनुमान है। व्यापारी अब यूरोप और यूके में नए नेटवर्क बना रहे हैं और इन देशों में निर्यात को बढ़ाने की तैयारी में हैं।
प्रभावित निर्यात मूल्य
अमेरिकी टैरिफ से यूपी के निर्यात पर कुल प्रभाव निम्न है:
- कुल प्रभावित निर्यात: 22,000 करोड़ रुपये ।
- लेदर: 2,500 करोड़ रुपये (कानपुर से अमेरिका को)।
- फुटवियर: 600-1,000 करोड़ रुपये।
- कालीन: 500-1,000 करोड़ रुपये।
- हैंडीक्राफ्ट: 600-1,200 करोड़ रुपये।
- कुल अनुमानित नुकसान: 5,000-7,000 करोड़ रुपये तात्कालिक।
- यूरोपीय अवसर: नई जानकारी के अनुसार, यूरोप में 3,500 करोड़ रुपये का निर्यात पहले से है, जो बढ़कर 5,000-6,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।