केजीएमयू प्रबंधन के हाथों की कठपुतली बना शिक्षक संघ

Lucknow: एक समय था जब केजीएमयू का शिक्षक संघ वहां होने वाले गलत कार्यों के विरोध में खड़ा दिखाई देता था। गलत तरीके से होने वाले प्रमोशन से लेकर भर्तियों में पक्षपात जैसे मुद्दे उठाए जाते थे, मगर आज शिक्षक संघ प्रबंधन के सुर में सुर मिलाकर बयानबाजी कर रहा है। राज्य महिला आयोग के समर्थकों के खिलाफ पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने का हवाला देकर शिक्षक संघ का हड़ताल में शामिल होना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। जबकि हड़ताल विरोध का अंतिम विकल्प होता है।

केजीएमयू के कर्मचारी और शिक्षक रेजिडेंट डाक्टरों के साथ मंगलवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे चुके हैं। इस हड़ताल की अगुवाई कर रहा है शिक्षक संघ। संघ में सबसे अहम पद पर तैनात सीनियर डाक्टर कुलपति के बेहद खास हैं। शिक्षक संघ ने ऐसे मुद्दे पर हड़ताल का आहवान किया जिसका सीधे तौर पर केजीएमयू के काम काज से कोई लेना देना नहीं है। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष कैम्पस आती हैं और उनके समर्थक वहां हंगामा करते हैं। हंगामें के विरोध में चीफ प्रॉक्टर ने पुलिस में शिकायत की मगर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की प्राथमिक जांच के बाद ही एफआईआर की जाएगी। इस बीच शिक्षक संघ की अगुवाई में कर्मचारियों ने हड़ताल की चेतावनी दे दी। हंगामें की घटना शुक्रवार को हुई और कर्मचारी मंगलवार से हड़ताल पर जाने की बात कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश के कई जिलों से आने वाले मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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दबाव की राजनीति अपना रहा शिक्षक संघ

केजीएमयू का शिक्षक संघ प्रशासन पर दबाव बनाना चाहता है। ऐसा माना जा रहा है कि संघ का मकसद केवल आयोग की उपाध्यक्ष के समर्थकों पर मुकदमा दर्ज करना नहीं बल्कि यह संदेश देना भी है कि वह अपने कुलपति के साथ खड़े हैं। अगर कोई कुलपति पर उंगली उठाएगा तो हड़ताल पर भी जा सकते हैं। कुछ फैकल्टी का यह कहना है कि अगर मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस प्रकार दबाव की राजनीति का संज्ञान लिया तो कई अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। संघ के कई पुराने पदाधिकारी इस रणनीति के पक्ष में नहीं हैं।

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