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यूपी-रेरा ने बनाया रिकॉर्ड: 2025 में निवेश में 53.5% की भारी वृद्धि, नोएडा और लखनऊ में सबसे ज्यादा निवेश

लखनऊ / गौतमबुद्ध नगर: उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP-RERA) के लिए साल 2025 एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ है। प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी और सरकारी नीतियों के चलते रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में यूपी-रेरा के तहत पूंजी निवेश में 53.5 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है। यूपी-रेरा की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में कुल 308 नई परियोजनाओं का पंजीकरण हुआ, जो साल 2024 (259 परियोजनाएं) के मुकाबले 19% अधिक है।

वर्ष 2025 में न केवल प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ी, बल्कि स्वीकृत यूनिट्स और निवेश में भी रिकॉर्ड इजाफा हुआ है।

मुख्य बिंदुवर्ष 2024वर्ष 2025वृद्धि (प्रतिशत में)
पंजीकृत प्रोजेक्ट्स25930819%
स्वीकृत यूनिट्स69,36584,97622.5%
कुल निवेश₹44,526 करोड़₹68,328 करोड़53.5%

NCR के बाहर भी बढ़ रहा रियल एस्टेट का दायरा

यूपी-रेरा के आंकड़े बताते हैं कि अब रियल एस्टेट का विकास केवल नोएडा और गाजियाबाद तक सीमित नहीं है। साल 2025 में कुल 308 प्रोजेक्ट्स में से 186 प्रोजेक्ट्स नॉन-एनसीआर क्षेत्रों में शुरू हुए हैं। लखनऊ 67 नई परियोजनाओं के साथ प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा रियल एस्टेट हब बनकर उभरा है।

इसके अलावा छोटे जिलों जैसे बुलंदशहर, रामपुर, चंदौली और मऊ में भी नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, जिससे प्रदेश के संतुलित विकास को मजबूती मिल रही है।

यूपी-रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी के अनुसार, “30 दिनों के भीतर प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन और पोर्टल की पारदर्शिता ने निवेशकों का विश्वास जीता है। हमारा लक्ष्य समय पर प्रोजेक्ट्स को पूरा करना और घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना है।”

परियोजना पंजीकरण में वृद्धि से दिखा बाजार में बढ़ता भरोसा

वर्ष 2024 में यूपी रेरा के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में कुल 259 रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण हुआ था। यह संख्या 2025 में बढ़कर 308 हो गई, यानी 49 परियोजनाओं की वृद्धि, जो लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी डेवलपर्स और निवेशकों के बीच यूपी रेरा की नियामक व्यवस्था पर नए सिरे से बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। साथ ही यह रियल एस्टेट क्षेत्र में कारोबार को आसान बनाने की दिशा में हुए सुधारों का भी संकेत है। यूपी रेरा के तहत लगातार बढ़ते पंजीकरण यह दिखाते हैं कि प्रदेश सरकार द्वारा टाउनशिप नीति जैसी विभिन्न पहल के जरिए एक स्थिर और सकारात्मक नीतिगत माहौल बनाया गया है। इसके अलावा, प्राधिकरण का पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल आईटी आधारित वेब पोर्टल प्रमोटरों को आसानी से आवेदन करने में मदद करता है और 30 दिनों के भीतर समय पर निस्तारण सुनिश्चित करता है।

आवासीय और व्यावसायिक यूनिटों में उल्लेखनीय वृद्धि
परियोजना पंजीकरण में वृद्धि के साथ-साथ वर्ष 2025 में निर्माण के लिए स्वीकृत यूनिटों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ। वर्ष 2024 में पंजीकृत परियोजनाओं के अंतर्गत 69,365 यूनिट प्रस्तावित थीं, जो 2025 में बढ़कर 84,976 हो गईं। यानी 15,611 यूनिट की वृद्धि, जो पिछले वर्ष की तुलना में 22.5 प्रतिशत अधिक है।

वर्ष 2025 में स्वीकृत कुल यूनिटों में से 62,672 आवासीय यूनिट हैं, जिनमें फ्लैट, प्लॉट और विला शामिल हैं। वहीं 22,304 यूनिट व्यावसायिक हैं, जैसे दुकानें, स्टूडियो और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं। वर्ष 2024 और 2025 को मिलाकर यूपी रेरा ने कुल 1,54,341 आवासीय और व्यावसायिक यूनिटों को मंजूरी दी है, जिससे घर खरीदारों और निवेशकों को कई विकल्प उपलब्ध हुए हैं। यह विस्तार प्रदेश की बढ़ती आवासीय और व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने में यूपी रेरा की अहम भूमिका को दर्शाता है।

निवेश में रिकॉर्ड वृद्धि
वर्ष 2025 में यूपी रेरा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में पूंजी निवेश की जबरदस्त बढ़ोतरी शामिल है। वर्ष 2024 में पंजीकृत परियोजनाओं के तहत कुल अनुमानित निवेश ₹44,526 करोड़ था, जो 2025 में बढ़कर ₹68,328 करोड़ हो गया। यानी ₹23,802 करोड़ की वृद्धि, जो लगभग 53.5 प्रतिशत अधिक है।

निवेश में यह तेज़ बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट बाजार में निवेशकों के मजबूत भरोसे को साफ तौर पर दिखाती है। यह सरकार की विकासोन्मुख प्राथमिकताओं और यूपी रेरा की प्रभावी नियामक व्यवस्था का भी परिणाम है, जो पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर परियोजनाओं को पूरा करने को सुनिश्चित करती है।

एनसीआर से आगे नए रियल एस्टेट केंद्रों का उभरना
हालांकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन वर्ष 2025 के आंकड़े संतुलित और क्षेत्रीय रूप से विविध विकास की ओर स्पष्ट बदलाव दिखाते हैं। वर्ष 2024 में पंजीकृत 259 परियोजनाओं में से 89 एनसीआर क्षेत्र में थीं, जबकि 170 परियोजनाएं गैर-एनसीआर जिलों में थीं।

वर्ष 2025 में यह रुझान और मजबूत हुआ। कुल 308 परियोजनाओं में से 122 एनसीआर क्षेत्र में और 186 परियोजनाएं गैर-एनसीआर क्षेत्रों में स्वीकृत हुईं। यह दर्शाता है कि सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और टियर-2 व उभरते शहरों के विस्तार का सकारात्मक असर पड़ा है।

गैर-एनसीआर क्षेत्रों में लखनऊ 2025 में 67 परियोजनाओं के साथ एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा। मथुरा में 23 परियोजनाएं पंजीकृत हुईं, जो धार्मिक पर्यटन और शहरी विकास से जुड़ी बढ़ती गतिविधियों को दर्शाती हैं। बरेली में 15 और आगरा में 14 परियोजनाओं के साथ अच्छा विकास देखा गया।

छोटे शहरों में भी देखने को मिला परियोजनाओं का विस्तार

वर्ष 2024 में परियोजना पंजीकरण 23 जिलों तक सीमित था, जो 2025 में बढ़कर 27 जिलों तक पहुंच गया। इससे छोटे और उभरते शहरों में निवेशकों की बढ़ती रुचि साफ दिखती है। नए जिलों में बुलंदशहर (3), रामपुर (2), चंदौली (3), उन्नाव, गोंडा, मऊ और मिर्जापुर (प्रत्येक में 1) परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन जिलों में कुल ₹1027 करोड़ का निवेश होना है।

धार्मिक शहरों में निवेश की लहर

प्रदेश के तीर्थ स्थलों में बुनियादी ढांचे के विकास का सीधा असर रियल एस्टेट पर दिख रहा है:

  • मथुरा: 23 नए प्रोजेक्ट्स के साथ निवेशकों का पसंदीदा केंद्र बना।

  • वाराणसी: पुनर्विकास योजनाओं के चलते 9 नए प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हुए।

  • अयोध्या व प्रयागराज: यहाँ भी क्रमशः 5 और 7 नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिली।

पश्चिमी यूपी सबसे आगे

यूपी-रेरा ने निगरानी के लिए प्रदेश को तीन हिस्सों में बांटा है, जिसमें पश्चिमी क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा:

  • पश्चिमी क्षेत्र: ₹55,620 करोड़ का निवेश (नोएडा, गाजियाबाद, आगरा मुख्य)।

  • मध्य क्षेत्र: ₹11,270 करोड़ का निवेश (लखनऊ, झांसी, कानपुर मुख्य)।

  • पूर्वी क्षेत्र: ₹1,436 करोड़ का निवेश (वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या मुख्य)।

उत्तर प्रदेश के धार्मिक एवं तीर्थ नगरों में बढ़ता रियल एस्टेट निवेश
वर्ष 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश के धार्मिक और तीर्थ नगरों में रियल एस्टेट निवेश और परियोजना पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि धार्मिक पर्यटन, बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे के विकास और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को दर्शाती है। अयोध्या, मथुरा, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहर योजनाबद्ध रियल एस्टेट विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जहां बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी पुनर्विकास योजनाओं और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।

अयोध्या में 5 रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण किया गया, जो शहर की बढ़ती धार्मिक और पर्यटन महत्ता के अनुरूप निवेशकों की स्थिर रुचि को दर्शाता है। मथुरा 23 परियोजनाओं के पंजीकरण के साथ एक प्रमुख गतिविधि केंद्र के रूप में उभरा, जहां आवासीय, हॉस्पिटैलिटी और व्यावसायिक स्थलों की मांग तेजी से बढ़ी है।

वाराणसी में 9 परियोजनाएं पंजीकृत की गईं, जो शहर में चल रही पुनर्विकास योजनाओं और इसके आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र होने की भूमिका को मजबूत करती हैं। वहीं प्रयागराज में 7 परियोजनाओं का पंजीकरण हुआ, जो शहर के दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं में निवेशकों के नए भरोसे को दर्शाता है।

उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों का प्रभाव
रियल एस्टेट क्षेत्र का यह मजबूत प्रदर्शन उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रिय और विकासोन्मुख नीतियों से जुड़ा है। एक्सप्रेसवे, मेट्रो रेल, औद्योगिक कॉरिडोर, स्मार्ट सिटी और शहरी पुनर्विकास जैसी योजनाओं ने प्रदेश को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाया है।

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