
नई दिल्ली: देश में डिजिटल लेन-देन करने वाले करोड़ों यूजर्स और व्यापारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की समयसीमा आगे बढ़ाई जा रही है। पहले यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होनी थी, जिसे अब 1 जनवरी 2027 तक टालने की तैयारी है।
त्योहारों के मद्देनजर लिया गया फैसला
अक्टूबर और नवंबर के महीने में दिवाली, धनतेरस और छठ जैसे बड़े त्योहारों के चलते बाजारों में खरीदारी चरम पर होती है। ऐसे समय में नया शुल्क ढांचा लागू करने से व्यापारियों के सामने तकनीकी और वित्तीय मुश्किलें खड़ी हो सकती थीं। पेमेंट कंपनियों, फिनटेक प्लेटफॉर्म्स और मर्चेंट संगठनों ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाया था। इकोसिस्टम को नए नियमों के अनुकूल तैयारी का पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से इस बदलाव को स्थगित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
क्या है प्रस्तावित MDR और कितना लगेगा शुल्क?
नए फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.4% (40 बेसिस पॉइंट) MDR प्रस्तावित किया गया है:
गणना: ₹2,000 के भुगतान पर लगभग ₹8 और ₹10,000 के भुगतान पर ₹40 का शुल्क बनेगा।
कैपिंग: ₹75,000 या उससे अधिक के बड़े ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 पर सीमित (कैप) रहेगा।
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आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
यह शुल्क केवल व्यावसायिक लेन-देन (P2M) के लिए प्रस्तावित है।
P2P ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के खाते में पैसे ट्रांसफर करने (P2P) पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
छोटे दुकानदार सुरक्षित: ₹2,000 तक की सामान्य खरीदारी और छोटे किराना लेन-देन पर जीरो MDR की नीति बरकरार रहेगी।
फिलहाल NPCI और पेमेंट स्टेकहोल्डर्स के बीच इस शुल्क के वितरण और विभिन्न श्रेणियों (जैसे यूटिलिटी बिल, लोन रीपेमेंट आदि) की तकनीकी स्पष्टता पर बातचीत अंतिम चरण में है।
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