Lucknow: विभिन्न योजनाओं के लिए पावर कारपोरेशन (UPPCL) जो आंकड़े देता है उनमें से अधिकांश मनगढंत होते हैं। यह बात कई बार उजागर हो चुकी है। गलती पकड़े जाने पर जब भी कारपोरेशन से जवाब मांगा गया उसने स्पष्ट उत्तर दिया ही नहीं। इसका ताजा उजागर बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी के लिए पेश किए गए आंकड़े रहे। जब नियामक आयोग (UPERC) ने उनकी समीक्षा की तो आंकड़े गलत मिले और दरों में बढ़ोतरी न करते हुए आयोग ने प्रस्ताव खारिज कर दिया।
अब सवाल उठता है कि इस प्रकार गलत आंकड़े देने वाले अफसरों को कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने घाटे वाले मनगढ़ंत आंकड़े आयोग को देने वाले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।मालूम हो कि पावर कॉरपोरेशन ने जब प्रदेश में बिजली दरें बढ़ाने के लिए लगभग 24,022 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देकर औसतन 28′ और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 45′ तक बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया था।
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वर्मा ने कारपोरेशन के घाटे की बात को गलत ठहराते हुए बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज करा दी। उपभोक्ता परिषद ने पीसीएल के वित्तीय आंकड़े पेश करते हुए दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को खारिज किए जाने की मांग रखी। टैरिफ पर हुई जन सुनवाई के बाद आयोग ने समझा कि कॉरपोरेशन के दिए गए आंकड़े सही नहीं हैं। नियामक आयोग की पड़ताल में 18,592 करोड़ रुपये का नया सरप्लस सामने आया, जिसे पहले से मौजूद 33,122 करोड़ रुपये के सरप्लस से जोडऩे पर कुल सरप्लस बढक़र 51,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
इस मामले में उपभोक्ता परिषद ने घोषणा की कि बिजली दरों में कमी की मांग को लेकर आयोग में पुनर्विचार/विधिक प्रस्ताव दाखिल किया जाएगा। वर्मा ने कहा कि जब नोएडा पावर कंपनी जैसी निजी कंपनी 1,242 करोड़ रुपये सरप्लस होते हुए भी लगातार 10′ रिबेट दे रही है, तो प्रदेश की सरकारी बिजली कंपनियों में भी दरें घटाना पूरी तरह न्यायसंगत है। आयोग ने निजी कंपनियों के मामले में इस सिद्धांत को स्वीकार किया है, इसलिए अब यह मानक सभी बिजली कंपनियों पर लागू होना चाहिए।
उनका कहना है कि कॉरपोरेशन ने गलत आंकड़ों के नाम पर जिस तरह टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था उसी तरह दक्षिणांचल और पूर्वांचल के 42 जनपदों के निजीकरण के लिए जमीन तैयार की गई थी। अगर सरकार को पावर कॉरपोरेशन के सभी आंकड़ों की उच्चस्तरीय जांच करवा दे तो सच्चाई सामने आ जाएगी। बिजली कम्पनियां घाटे में नहीं है या बात सभी समझ चुके हैं ऐसे में निजीकरण की बात करना बेमानी है।
