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मनरेगा के नए कानून के खिलाफ मजदूरों का प्रदर्शन, थाली बजाकर जताया विरोध

सीतापुर। मनरेगा से जुड़े नए कानून ‘विकसित भारत ग्राम जी’ के खिलाफ मंगलवार को सीतापुर जिले के कई ब्लॉकों में मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। गांव-गांव मजदूरों ने थाली बजाकर और गगनभेदी नारे लगाकर अपना विरोध जताया। नारों में “हमारी थाली खाली है”, “मनरेगा बचाओ, मजदूर बचाओ”, “काम हमारा हक है”, और “नया कानून वापस लो” जैसे संदेश गूंजते रहे।
ब्लाक मिश्रिख, मछरेहटा, गोंदलामऊ, पिसावां, महोली, एलिया, हरगांव, खैराबाद और परसेंडी सहित सैकड़ों गांवों में मजदूर एक साथ सड़कों पर उतरे और रैली निकालकर प्रदर्शन किया। मजदूरों का कहना था कि पहले मनरेगा में काम मांगते ही काम मिलना उनका कानूनी अधिकार था, लेकिन नए कानून में यह अधिकार कमजोर कर दिया गया है।

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प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पहले 100 दिन के काम की गारंटी थी, जबकि नए कानून में 125 दिन कहे जाने के बाद अब 60 दिन काम न मिलने की ही गारंटी रह गई है। पंचायतों की भूमिका घटने और मजदूरी के लिए राज्यों पर बोझ डाले जाने से काम मिलना और भी अनिश्चित हो जाएगा। मजदूरों ने यह भी कहा कि आधार आधारित भुगतान, ऑनलाइन हाजिरी और मजदूरी में देरी से पहले ही उनकी हालत खराब थी, अब नया कानून संकट को और बढ़ाएगा।

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मजदूरों का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों, महिलाओं और छोटे किसानों के लिए जीवनरेखा है और इसे कमजोर करना सीधे उनके पेट पर चोट है। प्रदर्शन में जगनाथ, सुरेंद्र, जमुना, रोशन लाल, सुधीर, पप्पू, राजाराम, रामदेवी, राजेश, कमला, नीतू, सीता, कलावती, रामसरन, विद्यासागर, रामसेवक, जसना, शिवचरण, पिंटू प्रकाश, कृष्णाशंकर, रामकुमार, हरिपाल, मोहन और भगवानदीन सहित बड़ी संख्या में मजदूर शामिल रहे।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर मनरेगा के नए कानून को वापस लेकर पुराने स्वरूप में योजना बहाल नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज और व्यापक किया जाएगा।

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