Civil Hospital: डॉक्टरों ने निकाला 26 सेंटीमीटर लंबा और 450 ग्राम का गॉल ब्लैडर, बचाई मरीज की जान

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शल्य विभाग (Surgery Department) की टीम ने एक बेहद जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डॉक्टरों ने एक मरीज के शरीर से 26 सेंटीमीटर लंबा और 450 ग्राम वजन का पित्ताशय (Gall Bladder) निकाला है। यह गॉल ब्लैडर पूरी तरह से मवाद (Pus) से भरा हुआ था।
रायबरेली का रहने वाला है मरीज
मरीज की उम्र 35 साल है और वह रायबरेली के बछरावां का रहने वाला है। उसे पिछले एक महीने से पेट में तेज दर्द था। साथ ही उल्टी और मितली की गंभीर शिकायत भी थी। 9 सितंबर 2026 को मरीज ने सिविल अस्पताल की ओपीडी में संपर्क किया।
जांच में पता चला कि मरीज के पित्ताशय में भारी मात्रा में मवाद और पथरी जमा है। गॉल ब्लैडर में गंभीर सूजन भी आ गई थी। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को ‘क्रोनिक कोलेसिस्टाइटिस और एम्पोईमा ऑफ गॉल ब्लैडर’ कहते हैं। रिपोर्ट देखते ही डॉक्टरों ने मरीज को भर्ती कर लिया और सर्जरी की तैयारी शुरू कर दी।
लिवर और आंतों से चिपका था गॉल ब्लैडर
ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों के सामने एक बड़ी और जटिल चुनौती थी। पित्ताशय का आकार असामान्य रूप से बहुत बड़ा हो चुका था। वह मवाद से भरा होने के कारण लिवर (Liver) के पीछे और बड़ी आंत (Intestines) से बुरी तरह चिपका हुआ था।
डॉक्टरों के लिए पित्ताशय को सुरक्षित निकालना आसान नहीं था। थोड़ी सी भी चूक होने पर पित्त की नली (CBD) या महत्वपूर्ण खून की नसों (Blood Vessels) को भारी नुकसान पहुंच सकता था।
‘जेंटल डिसेक्शन’ से मिली कामयाबी
शल्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा और उनकी टीम ने अपने अनुभव का शानदार इस्तेमाल किया। टीम ने ‘जेंटल डिसेक्शन तकनीक’ का उपयोग करते हुए पित्ताशय को आंतों और लिवर से बहुत सावधानी से अलग किया। रक्तस्राव को पूरी तरह नियंत्रित रखते हुए इस ऑपरेशन को सुरक्षित तरीके से पूरा किया गया। मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है।
मेडिकल साइंस में माना जाता है दुर्लभ मामला
निकाला गया गॉल ब्लैडर 26 सेंटीमीटर लंबा और 450 ग्राम का था। मेडिकल साइंस में इसे बहुत दुर्लभ माना जाता है। शल्य टीम के अनुसार, ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ सर्जरी केस रिपोर्ट्स’ में अब तक लगभग 30 सेंटीमीटर तक के सबसे बड़े पित्ताशय का ही उल्लेख मिलता है।
अस्पताल के निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने इस सफल और जटिल ऑपरेशन के लिए पूरी टीम को बधाई दी है। इस सर्जरी टीम में डॉ. आनंद मिश्रा के साथ जूनियर रेजिडेंट डॉ. विनोद कुमार वर्मा, डॉ. सचिन कुमार, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. डी.के. गुप्ता और ओटी असिस्टेंट डॉ. सुदेश कुमार शामिल रहे।
डॉक्टर की अपील: डॉ. आनंद मिश्रा ने आम जनता से अपील की है कि पेट दर्द, मितली, उल्टी, अपच या पीलिया जैसे लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। परेशानी होने पर तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
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