फ़िल्म दृश्यम-3 को प्रभावशाली बनाते हैं ‘राम’
दृश्यम में छा गए रंगमंच के साधक रामचंद्र सिंह: 'सैवियो' के सधे अभिनय और आंखों की भाषा ने खींचा ध्यान, हबीब तनवीर के 'नया थिएटर' से जुड़ा है नाम

कल लखनऊ में फ़िल्म दृश्यम-3 देखी, अच्छी लगी। सस्पेंस लगातार आख़िरी तक बना रहा। सबसे बड़ी बात तो इस फ़िल्म की राइटिंग है कि आगे क्या होने वाला है इसका एहसास नहीं होने पाता है।
दूसरी बात है फ़िल्म में कलाकारों का अभिनय। अजय देवगन तब्बू का काम तो सधा हुआ है ही लेकिन इसके बावज़ूद जिन दो एक्टर्स के काम से आप नज़र नहीं हटा सकते हैं वो हैं जयदीप अहलावत और सैवियो की भूमिका निभाने वाले एक्टर रामचंद्र सिंह , सैवियो वही क़ब्रिस्तान में काम करने वाला व्यक्ति।
इस बार कहानी में सैवियो की भूमिका और सैवियो के कोर्ट स्टेटमेंट पर बरबस ही आपकी नज़र ठहर जाती है। लेखक ने दृश्यम-3 की कहानी में सैवियो को प्रमुख भूमिका में रखा है।
सैवियो के चरित्र में जो ठहराव है जो असमंजस है, अपने काम की ईमानदारी व ज़िम्मेदारी के प्रति जो एहसास है वो उस चरित्र को कई लेयर देता है। सैवियो ज़्यादा बोलता नहीं कम शब्दों से काम चलाता है लेकिन उसके चेहरे का भाव उसकी बेचैनी और सबसे ज़्यादा उसकी आँखें बोलती है। आँखें तो उसकी ऐसी बोलती हैं जैसे कितना तूफ़ान कितनी उथलपुथल उसके मन मस्तिष्क में चल रही है।
इतने फ़िल्मी कलाकारों के बीच सैवियो का चरित्र निभाने वाले अभिनेता रामचंद्र सिंह पर हर दर्शक की नज़र ठहर ही जाती है । उनके अभिनय का ठहराव, अभिनय की परत दर परत गहराई, उनकी आँखों की भाषा आपका ध्यान खींच लेती है। चूँकि सैवियो कोई चतुर चालक या पेशेवर अपराधी नहीं है वो तो बस विजय के एहसान तले दबा हुआ है और उसकी मदद करने के चलते फँस गया है, ये साफ़ साफ़ आपको महसूस होता है।
सैवियो का मूल स्वभाव , परिस्थितिवश पैदा हुई उसकी उलझनें ,बेचैनी और काम के प्रति उसकी ज़िम्मेदारी के एहसास और असमंजस को अभिनेता रामचंद्र सिंह ने अपने अभिनय से बख़ूबी निभाया है।

अक्सर रियल परफॉर्म करने के चलते कई बार एक्टर्स द्वारा बोले गए शब्द दर्शकों को साफ़ सुनाई नहीं देते हैं लेकिन यहाँ रामचंद्र सिंह द्वारा बोले गए एक एक शब्द को आप साफ़ साफ़ सुन सकते हैं निश्चित ही ये एक्टर की स्पीचवर्क की विशेषता है।
अमूमन बड़ी स्टार कास्ट वाली फ़िल्मों में दर्शकों का और पत्रकारों का ध्यान मुख्यरूप से उन्हीं पर फोकस रहता है लेकिन दृश्यम-3 में आप सैवियो का किरदार निभाने वाले अभिनेता रामचंद्र सिंह से नज़र नहीं हटा सकते हैं , वो आपका ध्यान खींच ही लेंगे।
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उनके अभिनय में उनकी अभिनय के प्रति वर्षों की साधना , स्पीच वर्क व पैटर्न, ठहराव ,गहराई और आँखों की भाषा का परिचय मिलता है।
बॉलीवुड के लिए ये बहुत सुखद ख़बर है की बॉलीवुड को रंगमंच से निकला अभिनय का एक और बड़ा साधक मिल गया है, अब बॉलीवुड उनका सही सार्थक सदुपयोग करे।

बताते चलें कि रामचंद्र सिंह , पदमश्री व पदभूषण सम्मान से सम्मानित लेजेंड्री निर्देशक हबीब तनवीर द्वारा स्थापित नाटक कंपनी ‘नया थिएटर’ के एक्टिंग प्रैक्टिशनर है व वर्तमान में नया थिएटर के डायरेक्टर हैं और भोपाल मध्यप्रदेश में रहते हुए थिएटर कर रहे हैं।
हबीब तनवीर के नया थिएटर ने कई बेहतरीन एक्टर फ़िल्म इंडस्ट्री को दिए हैं। अब धीरे धीरे उन सभी के बारे में आपको अपने लेख के माध्यम से जानकारी देता रहूँगा।

फ़िलहाल रंगमंच/थिएटर से एक और नायाब हीरा फ़िल्म इंडस्ट्री को मिला है ये हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए उपलब्धि है और हम थिएटर वालों के लिए गर्व की बात है।
रामचंद्र सिंह जी को इतना बढ़िया काम करने के बहुत बहुत बधाई। नया थिएटर को व उनके सभी कलाकारों को भी बधाई।
रामचंद्र जी ने वैसे तो भारतेंदु नाट्य अकादमी से भी रंगमंच की पढ़ाई की है लेकिन उनके गुणों का उपयोग अभी तक ये संस्थान कर नहीं पाया है, हो सकता है इस फ़िल्म को देखने के बाद उन्हें इस लायक समझा जाये कि उनकी क्लासेज इस संस्थान में हो और नई पीढ़ी के एक्टर्स को एक्टिंग के गुर सीखने का मौका मिले।
ख़ैर, ख़ैर पर बात पूरी करता हूँ क्यूँकि सबके जीवन में कहीं न कहीं कुछ if’ कुछ ‘but’ रह ही जाता है।
अगर आप लोगों ने दृश्यम-३ नहीं देखी है तो ज़रूर देखिए। जयदीप अहलावत, रामचंद्र सिंह, नेहा जोशी (पुलिस इंस्पेक्टर), गायतोंडे, रघु,रजत कपूर समेत अजय देवगन व तब्बू के लिए भी।
-संदीप यादव
Sandeep Yadav
(पूर्व पत्रकार, लेखक व अभिनेता)
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