लखनऊ। राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के परिसर के बाहर सक्रिय दलाल गिरोह की गुंडागर्दी सामने आई है। गंभीर मरीजों को सरकारी अस्पताल से खींचकर निजी नर्सिंग होम में शिफ्ट कराने वाले सिंडिकेट ने 108 एंबुलेंस के इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) पर जानलेवा हमला कर दिया। दलालों की बात न मानने और मरीज की जानकारी साझा करने से इनकार करने पर ईएमटी को लात-घूंसों से पीटा गया और उसका सरकारी मोबाइल छीनकर आरोपी फरार हो गए। पीड़ित स्वास्थ्य कर्मी ने लोहिया पुलिस चौकी में लिखित शिकायत देकर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है।
केजीएमयू में नहीं मिला बेड, लोहिया पहुंचे थे परिजन
अयोध्या के रहने वाले शिव रतन गंभीर दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं। स्थानीय डॉक्टरों के रेफर करने पर परिजन उन्हें 108 एंबुलेंस से केजीएमयू के लारी कॉर्डियोलॉजी लेकर पहुंचे थे। वहां बेड खाली न होने की वजह से मरीज की जान जोखिम में देख एंबुलेंस चालक तुरंत उन्हें लेकर लोहिया संस्थान की इमरजेंसी पहुंचा।
सीयूजी नंबर पर आया फोन, जानकारी न देने पर भिड़े दलाल
अस्पताल की इमरजेंसी में जब परिजन कागजी प्रक्रिया पूरी कर रहे थे, तभी 108 एंबुलेंस के ईएमटी जितेंद्र शर्मा के सरकारी सीयूजी नंबर पर एक कॉल आई। फोन करने वाले शख्स ने मरीज की बीमारी का ब्योरा मांगा और उसे तुरंत बाहर लाने को कहा। जितेंद्र ने सरकारी प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए मरीज की गोपनीय जानकारी देने और उसे निजी अस्पताल के हवाले करने से साफ मना कर दिया। इसके कुछ ही मिनटों बाद तीन दबंग युवक एंबुलेंस के करीब पहुंचे और स्वास्थ्य कर्मियों को बाहर खींचने की कोशिश करने लगे।
घेरकर पीटा, आंख में आई गंभीर चोट
मरीज को सुरक्षित इमरजेंसी वार्ड में पहुंचाने के बाद जैसे ही एंबुलेंस परिसर से बाहर निकलने लगी, घात लगाए आरोपियों ने गाड़ी को रोक लिया। हमलावरों ने ईएमटी जितेंद्र शर्मा पर ताबड़तोड़ घूंसे बरसाने शुरू कर दिए।
हमले में जितेंद्र की आंख और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। वारदात के समय मौजूद एंबुलेंस पायलट अनुराग पांडेय ने किसी तरह बीच-बचाव किया। आरोपी जितेंद्र का मोबाइल छीनकर मौके से भाग निकले। पीड़ित कर्मचारियों ने संस्थान की पुलिस चौकी पहुंचकर घटना की सीसीटीवी फुटेज खंगालने और हमलावरों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
नाम बदलकर फिर सक्रिय हुआ ‘कमीशन माफिया’
एंबुलेंस कर्मचारियों का कहना है कि बड़े सरकारी अस्पतालों के बाहर निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के एजेंटों का संगठित जाल फैला हुआ है। ये दलाल गंभीर मरीजों को गुमराह कर या दबाव बनाकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराते हैं।
करीब चार साल पहले भी लोहिया संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. विक्रम सिंह की पहल पर विभूतिखंड पुलिस ने पांच दलालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उस वक्त संबंधित निजी अस्पताल के संचालन को भी बंद कराया गया था। आरोप है कि कुछ महीने शांत रहने के बाद उसी अस्पताल को नए नाम से दोबारा शुरू कर दिया गया और वही सिंडिकेट फिर से पैर पसार चुका है।
परिसर में दलालों की एंट्री पर होगी सीधी कानूनी कार्रवाई
“संस्थान परिसर के भीतर किसी भी निजी अस्पताल के एजेंट या दलाल को घुसने नहीं दिया जाएगा। अगर कोई संदिग्ध मिला तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। सुरक्षा कर्मियों को अलर्ट कर दिया गया है और पूरे मामले पर पुलिस को भी सख्त कार्रवाई के लिए औपचारिक पत्र भेजा जा रहा है।”
— डॉ. विक्रम सिंह, सीएमएस, लोहिया संस्थान
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