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आंकड़ों से नहीं, काम से घटेगी मातृ-शिशु मृत्यु दर: ब्रजेश पाठक

Lucknow: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने (Dy. CM Brajesh Pathak) ने कहा कि योजनाओं की सफलता कागजों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने से तय होती है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर (maternal and infant mortality rates) में कमी लाने के लिए हर गर्भवती महिला तक समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाना अनिवार्य है।

स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन की ओर से निजी होटल में आयोजित मातृत्व सुरक्षा संकल्प कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद डिप्टी सीएम ने निजी अस्पतालों से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर के आंकड़े समय से एकत्र न होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कोविड काल में निजी अस्पतालों से इलाज और मौतों के पूरे आंकड़े पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए थे, तो फिर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े निजी अस्पतालों से पूरी तरह क्यों नहीं लिए जा सकते। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए।

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मंच से डिप्टी सीएम ने परिवार कल्याण विभाग के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण से सवाल किया कि प्रदेश में प्रतिमाह कितने शिशुओं का जन्म होता है और उसके अनुपात में गर्भवती महिलाओं को कितनी आयरन की गोलियां दी जानी चाहिए। जवाब में लगभग 20 करोड़ आयरन टैबलेट की आवश्यकता बताई गई, जिस पर डिप्टी सीएम ने ड्रग कारपोरेशन (Drug Corporation) से आपूर्ति की स्थिति स्पष्ट करने को कहा, हालांकि वहां से कोई अधिकारी उपस्थित नहीं था।

डिप्टी सीएम ने अफसरों को चेताया कि वे जमीनी स्तर पर जाकर कार्य करें और बजट का उपयोग केवल मरीजों से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं पर करें। गैर-जरूरी मदों में खर्च पर कटौती करने के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाओं में सुधार से प्रदेश ने मातृ मृत्यु दर कम करने में प्रगति की है, लेकिन मातृ एवं नवजात मृत्यु और कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती हैं।

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अपर मुख्य सचिव अमित घोष ने बताया कि बीते दो दशकों में जागरुकता और संसाधनों के बेहतर उपयोग से मातृ मृत्यु दर घटकर प्रति एक लाख पर 141 तक आ गई है। कार्यक्रम में स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के सीईओ व पूर्व मुख्य सचिव मनोज सिंह, अपर मुख्य सचिव अमित घोष व एनएचएम की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल,लखनऊ मंडल के अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता, सीएमओ डॉ. एनबी सिंह सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य अधिकारी और चिकित्सक मौजूद रहे।

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