
लखनऊ। देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान सीएसआईआर–केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (CSIR-CDRI) ने औषधि खोज (Drug Discovery) और जैव-चिकित्सा अनुसंधान (Biomedical research) के क्षेत्र में अपनी गौरवशाली यात्रा के 75 वर्ष पूरे कर लिए। मंगलवार को संस्थान ने अपना 75वां वार्षिक दिवस ‘प्लेटिनम जुबली’ (Platinum Jubilee) समारोह के रूप में मनाया। इस अवसर पर देश के जाने-माने जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ और मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. अभय बंग ने वैज्ञानिकों को प्रयोगशाला से निकलकर स्थानीय समाज की समस्याओं को हल करने का मूल मंत्र दिया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीएसआईआर (CSIR) की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी और विशिष्ट अतिथि के रूप में आईकेपी नॉलेज पार्क के सीईओ डॉ. सत्य दाश मौजूद रहे।
‘रिसर्च विद द पीपल’: डॉ. बंग का संदेश
समारोह के दौरान “Research with the People” (लोगों के साथ अनुसंधान) विषय पर बोलते हुए पद्मश्री डॉ. अभय बंग ने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा, “रिसर्च का उद्देश्य उस समुदाय की जरूरतों को पूरा करना होना चाहिए जिसके साथ हम काम करते हैं, न कि केवल उस शोध समुदाय (Research Community) को खुश करना जिसे हम अपनी रिपोर्ट सौंपते हैं।”

SEARCH, गढ़चिरोली के सह-संस्थापक डॉ. बंग ने कहा कि विज्ञान का असली फायदा तभी है जब वह स्थानीय चुनौतियों और सामाजिक वास्तविकताओं से जुड़ा हो। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में अपने प्रयोगों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे जमीनी साक्ष्य (Ground Evidence) बड़े बदलाव ला सकते हैं।
भविष्य की तैयारी: ‘थिंकिंग बिग, एमिंग हाई’
संस्थान की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन ने सीडीआरआई (CDRI) की साल भर की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संस्थान के कई वैज्ञानिकों को इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर के सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्होंने प्लेटिनम जुबली को केवल एक पड़ाव नहीं, बल्कि भविष्य की उड़ान बताया और वैज्ञानिकों को “Thinking Big, Aiming High” (बड़ा सोचो, ऊंचा लक्ष्य रखो) के मंत्र के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

देश का खजाना: ‘वर्चुअल हर्बेरियम’ हुआ लॉन्च
इस ऐतिहासिक मौके पर सीडीआरआई ने अपने वर्चुअल हर्बेरियम (Virtual Herbarium) का अनावरण किया। यह शोधकर्ताओं के लिए किसी खजाने से कम नहीं है।
- इसमें 30,000 से अधिक पौधों के नमूने संरक्षित हैं।
- यह भारत के अलावा जर्मनी, इटली, जापान और नेपाल जैसे देशों के दुर्लभ पौधों का घर है।
- यह न्यूयॉर्क बॉटैनिकल गार्डन के इंडेक्स में भी शामिल है।
4 बड़े संस्थानों के साथ हुआ समझौता (MoU)
स्थापना दिवस पर सीडीआरआई ने स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए चार महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) साइन किए:
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कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान (KSSSCI) , लखनऊ: कैंसर के इलाज और रिसर्च में सहयोग के लिए।
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नाइपर (NIPER), हैदराबाद: फार्मास्युटिकल साइंस में बेसिक रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए।
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अगनिथा कॉग्निटिव सॉल्यूशंस (Aganitha Cognitive Solutions) : एआई (AI) और डीप लर्निंग के जरिए दवाओं की खोज तेज करने के लिए।
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ह्यूवेल लाइफसाइंसेज (Huwel Lifesciences): स्वदेशी हेल्थ टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए।
इनोवेशन ही कुंजी है
मुख्य अतिथि डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि आज भारतीय विज्ञान को रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विषयों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “पहले कभी न जुड़े बिंदुओं को जोड़ना ही सृजनात्मकता की कुंजी है।” उन्होंने सीडीआरआई को ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में बायोफार्मा सेक्टर का नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित किया।

सरकार द्वारा बायोफार्मा क्षेत्र पर बढ़ते जोर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अनुसंधान से अनुप्रयोग तक की प्रक्रिया को मजबूत करना, स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करना और उद्योग–शैक्षणिक सहयोग बढ़ाना सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि 75 वर्षों की विरासत वाला परिपक्व संस्थान होने के नाते सीडीआरआई (CDRI) पर विकसित भारत की परिकल्पना में स्वास्थ्य एवं बायोफार्मा क्षेत्र में प्रभावी, सहयोगात्मक और टिकाऊ कार्यक्रमों के माध्यम से योगदान देने की विशेष जिम्मेदारी है।
वहीं, डॉ. सत्य दाश ने वैज्ञानिकों से ‘उद्यमी’ (Entrepreneur) बनने और अपनी रिसर्च को बाजार तक ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप्स और युवा उद्यमी प्रयोगशाला अनुसंधान को व्यवहारिक तकनीकों, उत्पादों और स्वास्थ्य समाधान में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान छात्रों एवं शोधकर्ताओं में उद्यमी सोच को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करते हैं, जिससे मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनता है। उन्होंने कहा कि भारत में भी मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन सहयोग और उद्योग–शैक्षणिक साझेदारी के माध्यम से ऐसी संस्कृति विकसित करना आवश्यक है, जिससे अनुसंधान का रूपांतरण तेज हो, नवाचार-आधारित विकास को बल मिले और देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े।
प्लेटिनम जुबली के इस जश्न ने यह साबित कर दिया कि सीडीआरआई न केवल अपने इतिहास पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी पूरी तरह तैयार है। कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव डॉ. आमिर नज़ीर ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।




