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केजीएमयू धर्मांतरण मामला: रमीज के बयान से खुलेंगे कई राज

Lucknow:  धर्मांतरण, लव जिहाद एवं यौन शोषण मामले का आरोपी किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी रेजिडेंट (KGMU) डॉ. रमीज पुलिस की गिरफ्त में है। पुलिस को दिए उसके बयान से कई राज खुल रहे हैं। पूछताछ में पता चला है कि उसने बड़ा वकील करने के लिए कई तरफ से वित्तीय मदद एकत्र की है। पुलिस यह पता लगा रही है कि फरारी के दौरान 18 दिनों में रमीज कहां रहा और कौन लोग उसके सम्पर्क में थे। रमीज के जवाब कई राज से पर्दा उठाएंगे कि क्या केजीएमयू में धर्मांतरण का यह पहला मामला है या इससे पहले भी ऐसी कोशिशें होती रही हैं।

केजीएमयू धर्मांतरण मामले गिरफ्तार डॉक्टर रमीज किस नेटवर्क के लिए काम करता है पुलिस उसका पता लगाने की कोशिश कर रही है। कैम्पस में हुए धार्मिक आयोजन की तस्वीरों ने यह शक और गहरा दिया है कि संस्थान के डाक्टर धर्मांतरण कराने वाले नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। धर्मांतरण के इस मामले में पुलिस के साथ ही राष्ट्रीय जांच एजेंसियां भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। डाक्टर रमीजुद्दीन से जुड़े हर वह व्यक्ति जांच के दायरे में है जिसका आरोपी के साथ अधिक जुड़ाव था।

पुलिस के मुताबिक फरारी के दौरान रमीज कई डॉक्टरों के संपर्क में रहा। बताया जा रहा है कि उसने केस से खुद को बचाने के लिए महंगे वकीलों की व्यवस्था के लिए बड़ी रकम भी जुटाने की कोशिश की है। उसके बैंक खातों में अलग-अलग एकाउंट से पैसा आने की भी बात सामने आ रही है। पुलिस अब रमीज मलिक को शरण देने वाले लोगों की तलाश में है। सूत्रों की मानें तो रमीज ने अगर सच्चाई बताई तो कई ऐसे चेहरे सामने आ सकते हैं जो फिलहाल अभी पर्दे के पीछे से अपनी योजनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

केजीएमयू प्रशासन पर उठे सवाल

केजीएमयू प्रशासन पर इस मामले को दबाने का आरोप है। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव (Aparna Yadav )का आरोप है कि पीडि़ता ने पहले पैथालॉजी विभाग के एचओडी से शिकायत की थी। लेकिन वहां उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद उसने महिला आयोग व पुलिस में शिकायत की। कहा कि मानसिक रूप से आहत होकर पीडि़ता ने आत्महत्या का प्रयास किया। अपर्णा यादव ने केजीएमयू प्रशासन की विशाखा कमेटी पर उचित प्रकार से अपनी जिम्मेदारी न निभाने का भी आरोप लगाया है।

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अब एटीएफ कर रही मामले की जांच

केजीएमयू प्रशासन ने धर्मांतरण मामले की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की थी, जिसे सीएम के आदेश पर भंग करते हुए जांच यूपी एसटीएफ (UP STF) को सौंपी गई है। एसटीएफ आरोपी डॉक्टर के साथ मामले से जुड़े सभी संभावित नेटवर्क और फंडिंग के बारे में भी पता करेगी। गौरतलब है कि शुक्रवार को हुए हंगामे के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ (cm Yogi Adityanath) ने केजीएमयू कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को तलब किया था जहां उन्होंने घटनाक्रम की जानकारी देने के अलावा अब तक की गई कार्रवाई से सीएम को अवगत कराया।

यह है पूरा मामला

केजीएमयू के पैथालॉजी विभाग में तैनात रेजिडेंट डॉ. रमीज मलिक पर महिला रेजीडेंट ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण और धर्मांतरण का आरोप लगाया था। आरोप था कि धर्म परिवर्तन न करने की वजह से रमीज ने शादी से इनकार कर दिया था। इससे दुखी होकर महिला डॉक्टर ने बीती 17 दिसम्बर को खुदकुशी की कोशिश की थी। पीडि़ता ने महिला आयोग में शिकायत के साथ ही पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि रमीज ने शादी का झांसा देकर उसका कई महीने तक शोषण किया। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही आरोपी डाक्टर फरार था। करीब 18 दिनों बाद वह पुलिस की गिरफ्त में आया।

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