KGMU: कैंसर से जूझ रही महिला को बिना सर्जरी मिली बड़ी राहत, डॉक्टरों ने पहली बार इस तकनीक से किया इलाज
LUCKNOW: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के डॉक्टरों ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई कामयाबी हासिल की है। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी और गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग की टीम ने मिलकर गॉल ब्लैडर (Gallbladder) के कैंसर से जूझ रही एक महिला को बिना चीर-फाड़ (Without Surgery) के बड़ी राहत दी है। डॉक्टरों का दावा है कि केजीएमयू के इतिहास में पहली बार ‘ट्रांसहेपेटिक असिस्टेड पेरोरल डुओडनल स्टेंटिंग’ (Transhepatic Assisted Peroral Duodenal Stenting) तकनीक का सफल इस्तेमाल किया गया है।
खाना-पानी तक हो गया था बंद
डॉक्टर्स ने बताया कि पारा की रहने वाली 56 वर्षीय महिला गॉल ब्लैडर के कैंसर से पीड़ित थी। बीमारी इतनी बढ़ चुकी थी कि कैंसर पेट और लिवर तक फैल गया था। इस वजह से महिला की हालत बेहद गंभीर हो गई थी। पेट के रास्ते में रुकावट आने के कारण वह कुछ भी खा नहीं पा रही थी, यहाँ तक कि पानी पीने पर भी उल्टी हो जाती थी। कुपोषण के कारण मरीज का जीवन संकट में था।
जब फेल हो गए पुराने तरीके
डॉक्टर्स के मुताबिक आमतौर पर ऐसी स्थिति में ‘एंडोस्कोपिक डुओडनल स्टेंटिंग’ का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन मरीज की हालत इतनी खराब थी और रुकावट इतनी ज्यादा थी कि सामान्य एंडोस्कोपिक तकनीक से इलाज करना मुमकिन नहीं था। ऐसे में डॉक्टरों ने एक नया और जटिल रास्ता अपनाने का फैसला किया।
कैसे किया गया यह अनूठा प्रोसीजर?
रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. सौरभ ने बताया कि यह प्रक्रिया बिना किसी बड़े ऑपरेशन के की गई। सबसे पहले अल्ट्रासाउंड की मदद से नाभि के ऊपर से एक सुई (Needle) डालकर लिवर के जरिए पित्त की नली (Bile Duct) तक एक तार पहुंचाया गया।
इसके बाद, दूसरा तार मुंह के रास्ते पेट तक पहुंचाया गया। इन दोनों तारों को आपस में पकड़कर मुंह के रास्ते बाहर खींचा गया। अंत में, एंडोस्कोप की मदद से पेट के कैंसर प्रभावित हिस्से में स्टेंट (Stent) डाला गया, जिससे रुकावट दूर हो गई। इस प्रक्रिया के बाद अब मरीज सामान्य लोगों की तरह मुंह से खाना-पीना कर पा रहा है।
इलाज में शमिल रही डॉक्टरों की टीम
यह जटिल प्रक्रिया गैस्ट्रोइंट्रोलाॅजी विभाग के डॉ. सुमित रूंगटा, डॉ. अनन्य गुप्ता और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. सौरभ, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. नितिन और डॉ. सूर्य ने पूरी की। सम्पूर्ण प्रक्रिया रेडियो डायग्नोसिस विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनित परिहार और डॉ. मनोज कुमार का मार्गदर्शन में की गई।
गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने बताया कि मरीज की हालत बहुत नाजुक थी। हालांकि, इस तकनीक से कैंसर को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन इसका मकसद मरीज की ‘क्वालिटी ऑफ लाइफ’ (Quality of Life) को बेहतर बनाना था। अब मरीज बिना दर्द और परेशानी के भोजन कर सकता है, जो इस गंभीर बीमारी से पीडि़त मरीज के लिए बहुत बड़ी राहत है।




