गुणवत्ता को आदत बनाकर ही मिलेगी औद्योगिक उत्कृष्टता

जयपुर। क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया (QCFI), जयपुर चैप्टर का 20वां चैप्टर कन्वेंशन (CCQC) मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (MUJ) में आयोजित हुआ। इस वर्ष कार्यक्रम का विषय “गुणवत्ता के साथ सतत विकास और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर” रखा गया। सम्मेलन में उद्योग जगत के प्रमुख विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और औद्योगिक विकास में गुणवत्ता की भूमिका को रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि कमांडर डॉ. अनिल राणा (प्रो-प्रेसिडेंट, मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर) ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी संगठन में गुणवत्ता केवल उत्पाद तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह प्रक्रिया, प्रबंधन और संस्कृति का हिस्सा बननी चाहिए, तभी कोई संस्थान दीर्घावधि में टिकाऊ रह सकता है। प्रो. मनोज मेश्राम (चेयरमैन, क्यूसीएफआई जयपुर चैप्टर) ने बताया कि पिछले 44 वर्षों से क्यूसीएफआई भारतीय उद्योगों में वर्ल्ड क्लास मैन्युफैक्चरिंग (डब्ल्यूसीएम) और स्किल एक्सीलेंस की अवधारणा को बढ़ावा दे रहा है, और यह मंच उद्योगों को यह सिखाता है कि गुणवत्ता में निरंतर सुधार ही ग्राहक संतुष्टि, लागत नियंत्रण और उत्पादकता बढ़ाने का सबसे कारगर तरीका है।
एन.के. जैन (अध्यक्ष, एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान) ने कहा कि जो कंपनियां गुणवत्ता प्रबंधन को गंभीरता से नहीं लेतीं, वे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाती हैं, जबकि गुणवत्ता-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने वाले संगठन बाज़ार में भरोसा और स्थायित्व दोनों हासिल करते हैं। रिन्यू पावर, आशीर्वाद पाइप्स, सीईएससी, सेल (एसएईएल) और भास्कर ग्रुप जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे गुणवत्ता मानकों (जैसे आईएसओ 9001, आईएसओ/आईईसी 17025) को अपनाने और सिक्स सिग्मा जैसी पद्धतियों को लागू करने से उत्पाद विश्वसनीयता, सुरक्षा संस्कृति और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होता है। राजस्थान सरकार के उद्योग विभाग के उप आयुक्त त्रिलोक चंद वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार भी उद्योगों में गुणवत्ता सुधार के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार सहयोग कर रही है।

कार्यक्रम में देशभर की कई प्रमुख कंपनियों- एनटीपीसी की विभिन्न इकाइयों, रिन्यू पावर, आरसीएफ, सेल, दानुका एग्रीटेक, भिलाई स्टील प्लांट सहित कई अन्य संस्थानों- के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और केस स्टडी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि छोटे-छोटे गुणवत्ता सुधार भी किस तरह बड़े पैमाने पर उत्पादकता और लागत बचत ला सकते हैं। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि गुणवत्ता कोई एकबारगी लक्ष्य नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है- जो कर्मचारियों की भागीदारी, नेतृत्व की प्रतिबद्धता और निरंतर सीखने की संस्कृति से ही संभव होती है।
समापन सत्र में श्दिलीप कुमार जैन (पूर्व कार्यकारी निदेशक, आईएफसीआई लिमिटेड) और डॉ. ए.के. जैन (डायरेक्टर, आरसीएम) ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुणवत्ता आज के प्रतिस्पर्धी दौर में किसी भी संस्थान के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे गुणवत्ता को अपने कार्यक्षेत्र में एक आदत के रूप में अपनाएं, क्योंकि यही किसी भी संगठन को उत्कृष्टता और स्थायित्व की ओर ले जाती है। कार्यक्रम के समापन पर संयुक्त सचिव डॉ. विनोद यादव ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन उद्योगों को गुणवत्ता के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर एक कदम और आगे ले जाने का प्रयास है। कार्यक्रम में क्यूसीएफआई नॉर्थ ज़ोन के डायरेक्टर अविनाश चंद्र उपाध्याय, मुख्य ज्यूरी प्रो. राजेश सोलंकी, कोषाध्यक्ष श्री चेतन लाल मीना, प्रो अनिल मेहता, डॉ. रमेश मित्तल तथा डॉ. कृष्णकांत पांडेय सहित सभी गवर्निंग काउंसिल सदस्य मौजूद रहे। मंच का संचालन डॉ. प्रभात दीक्षित ने किया। कार्यक्रम के अंत में मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन्हें उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों ने खूब सराहा।
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