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देश की रक्षा करने वाले अर्द्धसैनिक बलों को पुरानी पेंशन नहीं, यह कैसा राष्ट्रवाद? : विजय बंधु

रायबरेली। अटेवा पुरानी पेंशन बचाओ मंच उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में 11 जून को शहीद स्थल काकोरी लखनऊ से प्रारम्भ हुई जनजागरण यात्रा आज जिले में पहुँची। सोमवार को यात्रा जनपद लखनऊ, सीतापुर, हरदोई और सीतापुर होते हुए बछरावां पहुँची। जनपद रायबरेली में आज यह यात्रा बछरावां, गुरुबख्शगंज, खीरों, सरेनी, लालगंज, मॉर्डन कोच फैक्ट्री से होकर गुज़री।

“अर्द्धसैनिक बलों को पेंशन न देना कैसा राष्ट्रवाद?”

इस अवसर एनएमओपीएस के राष्ट्रीय एवं अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा ये जन जागरण यात्रा शिक्षा, चिकत्सा, रोज़गार, पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी लागू होने से पहले नियुक्ति शिक्षकों को टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता आदि मुद्दों को लेकर जनजागरण के लिए निकाली जा रही है। पुरानी पेंशन कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है, सभी कर्मचारियों को एकजुटता के साथ इसकी बहाली के लिए संघर्ष करना होगा। क्योंकि यह कर्मचारियों के बुढ़ापे का साहारे के साथ सामाजिक सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार है। देश में राजकीयकरण करने से ही गरीबों, किसानों, मजदूरों, युवाओं को शिक्षा, स्वस्थ रोजगार मिलेगा। देश के माननीय लोग अलग अलग सदन की अलग पेंशन लेते है जबकि देश की रक्षा करने वाले अर्द्ध सैनिक बलों को पुरानी पेंशन न देना कौन सा राष्ट्रवाद है।

उन्होंने कहा परीक्षा हो या खेल हो, शुरु होने से पहले नियम बनते हैं, लेकिन सेवारत शिक्षकों के लिए टेट का नियम बाद में, आखिर क्यों? लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बार-बार पेपर लीक, आखिर क्यों? जब सांसदों विधायकों के पद एक दिन भी खाली नहीं रहते तो, सरकारी विभागों में शिक्षकों, कर्मचारियों के पद सालों साल खाली, आखिर क्यों? सरकारी विभागों में सालों साल से लाखों पद खाली हैं दूसरी तरफ सड़कों पर बेरोजगार युवा लाठियां खा रहा, आखिर क्यों? सांसद का बेटा सांसद, मंत्री का बेटा मंत्री, और किसान, मजदूर का पढ़ा लिखा स्नातक किया हुआ बेटा बेरोजगार, आखिर क्यों? माननीयों को मिल रही चार-चार पेंशन, देश की रक्षा करने वाले अर्धसैनिक बलों को पुरानी पेंशन नहीं, आखिर क्यों?

माननीयों को कई प्रकार के भत्तों में मिलते हैं लाखों रूपए, बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता नहीं, आखिर क्यों? माननीयों को बस, रेल व हवाई यात्रा फ्री, तो युवा बेरोजगार को परीक्षा हेतु यात्रा फ्री नहीं, आखिर क्यों? इस लिए हमारी कोशिश है कि पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए। सेवारत शिक्षकों पर थोपी गई टीईटी को समाप्त किया जाए। सरकारी संस्थानो के अंधाधुंध हो रहे निजीकरण को समाप्त किया जाए। सरकारी विभागों में लाखों रिक्त पड़े पदों को तत्काल भरा जाए। आउटसोर्सिंग, संविदा व अस्थायी कर्मचारियों का स्थायीकरण किया जाए। वित्त विहीन शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं अन्य कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन दिया जाए शिक्षकों-कर्मचारियों से उनके मूल कार्यों से इतर जो अन्य कार्य कराये जाते हैं, उनके स्थान पर युवा बेरोजगारों को पद सृजिन कर उन्हे रोजगार के अवसर दिये जाएं।

46 डिग्री के भीषण तापमान में भी मिला जनता का साथ

जिला सयोंजक इरफ़ान अहमद ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा इस ‘भीषण गर्मी और 42 से 46 डिग्री तापमान के बावजूद’ जिस प्रकार ‘शिक्षकों, कर्मचारियों, युवाओं, किसानों, छात्रों, अधिवक्ताओं, महिलाओं एवं आम जनमानस ने यात्रा को अपना समर्थन दिया, वह अभूतपूर्व और प्रेरणादायक’ है। गाँव-गाँव, ब्लॉक ब्लॉक में हुए संवादों ने यह सिद्ध कर दिया कि जनता अपने अधिकारों, पुरानी पेंशन, शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर सजग है और परिवर्तन की इस मुहिम के साथ खड़ी है। जनजागरण यात्रा 23 जून को डलमऊ, गौरा, जगतपुर, ऊँचाहार होते हुए कालाकांकर प्रतापगढ़ को रवाना हो जाएगी। कार्यक्रम में अटेवा के प्रदेश नीरजपति त्रिपाठी, प्रदेश संगठन मंत्री रजत प्रहरी, प्रदेश आईटी सेल प्रभारी आर्यन वेद, इरफ़ान अहमद, राजकुमार गुप्ता, अन्जनी मौर्या, मोहम्मद नसीम, मयंक वर्मा, अनवर अली, अनिल यादव, अविनाश यादव, अग्रसेन आदि उपस्थित रहे।

विजय बंधु ने सरकार से पूछे तीखे सवाल (आखिर क्यों?)

  • TET का नियम: खेल शुरू होने से पहले नियम बनते हैं। पुराने सेवारत शिक्षकों के लिए बीच में TET का नियम क्यों थोपा गया?

  • पेपर लीक: लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और बार-बार पेपर लीक आखिर क्यों हो रहे हैं?

  • खाली पद: माननीयों के पद एक दिन भी खाली नहीं रहते। फिर सरकारी विभागों में शिक्षकों और कर्मचारियों के पद सालों-साल खाली क्यों पड़े हैं?

  • बेरोजगारी: सांसद का बेटा सांसद बनता है। लेकिन किसान और मजदूर का पढ़ा-लिखा बेटा सड़कों पर लाठियां खा रहा है, ऐसा क्यों?

  • सुविधाएं: माननीयों को बस, रेल और हवाई यात्रा फ्री मिलती है। फिर बेरोजगार युवाओं को परीक्षा देने जाने के लिए यात्रा फ्री क्यों नहीं है?

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Sunil Yadav

संपादक, और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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