UP

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुददे पर जनता के खिलाफ हुआ अभियंता संघ

Lucknow: ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के मुद्दे जनता से साथ मांगने वाला अभियंता संघ (Abhiyanta Sangh) स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर जनता के खिलाफ हो गया है। संगठन के पूर्व महासचिव प्रभात सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Meters) को भविष्य का मीटर करार दिया है। पोस्ट पर बकायदा अभियंता संघ का लोगो छपा है जो यह साबित करता है कि यह विचार प्रभात सिंह के अकेले का नहीं बल्कि पूरे संगठन का है।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर आज पूरे उत्तर प्रदेश में बवाल मचा है। जगह लोग स्मार्ट प्रीपेड मीटर को हटाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लखनऊ, जौनपुर, आगरा, फतेहपुर व मेरठ में महिलाओं ने अपने घरों से मीटरों को उखाडक़र उपकेन्द्र से लेकर सडक़ तक प्रदर्शन किया। विभाग द्वारा इन लोगों पर मुकदमें दर्ज कराए जा रहे हैं। यह प्रदर्शन दर्शाते हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जनता बेहद परेशान है। इन सबके बीच अभियंता संघ के पूर्व महासचिव की सोशल मीडिया पोस्ट ने साबित कर दिया कि बिजली कर्मियों को जनता के हितों से कोई सरोकार नहीं है।

ये वही लोग है जो निजीकरण की बात होने पर जनता के बीच पंचायत कर यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि इससे जनता का अहित होगा। निजीकरण से बिजली महंगी हो जाएगी। समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं होती। ऐसे तर्क देकर संगठन जनता से उनका साथ मांग रहा था ताकि पावर कारपोरेशन प्रबंधन और सरकार पर दबाव बना सके। संघ की बातों को सुनकर जनता उनके प्रति सहानुभूति रख रही थी मगर स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर संगठन जो पैंतरा बदला है उससे स्पष्टï हो गया कि कर्मचारी कभी भी जनता का हितैषी नहीं हो सकता।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के विरोध में आप का प्रदर्शन

AAP

राजधानी लखनऊ में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर बढ़ते जनाक्रोश के बीच अब राजनीतिक पार्टियों की इंट्री हो गई है। रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता, कथित गलत बिलिंग और बार-बार बिजली कटौती के विरोध में शक्ति भवन पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद कई पदाधिकारियों को हिरासत में ले लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपते हुए प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था तत्काल वापस लेने की मांग की। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह योजना उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय आर्थिक बोझ बढ़ाने का माध्यम बन गई है। पार्टी के अयोध्या प्रांत अध्यक्ष विनय पटेल ने कहा कि स्मार्ट मीटर योजना जनता के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है। उनका दावा है कि बैलेंस समाप्त होते ही बिजली आपूर्ति तुरंत काट दी जाती है, लेकिन रिचार्ज कराने के बाद भी कई बार घंटों तक बिजली बहाल नहीं होती। आरोप लगाया कि जिन परिवारों का मासिक बिजली बिल पहले लगभग 1500 रुपये आता था, वही अब 6000 से 7000 रुपये तक पहुंच रहा है। कहा कि किसानों के नलकूपों पर लगाए जा रहे 4जी स्मार्ट मीटर नेटवर्क की कमी के कारण सही ढंग से कार्य नहीं कर पा रहे हैं, जिससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

स्मार्ट मीटर मामले में फैसला लेने में देरी से बढ़ रहा गुस्सा

स्मार्ट प्रीपेड मीटर की तकनीकी खामियां उजागर हो चुकी हैं। पावर कारपोरेशन के साथ विद्युत नियामक आयोग के संज्ञान में पूरा मामला होने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर फैसला लेने में हो रही देरी से लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। मामले में उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रश्न उठाया है कि किन अफसरों व संस्थाओं के निर्णयों के कारण पूरे राज्य में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई? प्रदेश में कुल 2,94,83,986 घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं में से लगभग 77,15,951 उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। करीब 75,05,244 उपभोक्ताओं के मीटरों को प्रीपेड मोड में उनकी सहमति के बिना बदला गया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि नियामक आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में कारपोरेशन को नोटिस तो जारी किया मगर उस पर कोई जवाब अभी तक नहीं मिला है।

विकल्प चुनना उपभोक्ता का अधिकार

उपभोक्ताओं का संवैधानिक अधिकार है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार मीटरिंग प्रणाली का चयन करें। यदि केंद्र सरकार के प्रावधानों व विद्युत अधिनियम का पालन अनिवार्य है, तो प्रदेश में भी इनका अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मगर यूपीपीसीएल ऐसा नहीं कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस जनता के हितों को देखते हुए इस प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिम्मेदार अधिकारियों एवं संस्थाओं की पहचान कर उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उपभोक्ताओं को प्रीपेड एवं पोस्टपेड के चयन का अधिकार तत्काल प्रभाव से दिया जाए। जिन कनेक्शन को बिना सहमति के प्रीपेड में परिवर्तित किया गया है उन्हें पोस्टपेड में बदला जाए। नए विद्युत कनेक्शनों में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त की जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button