Health

लोकबंधु अस्पताल में नवजात की मौत पर जांच तेज, डॉक्टरों से पूछताछ

Lucknow: लोकबंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय में प्रसव के दौरान नवजात (newborn) के फर्श पर गिरने से हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश देते हुए अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। उधर अस्पताल प्रशासन भी जांच की बात कर रहा है। मंगलवार को गठित जांच समितियों ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मियों से पूछताछ की। दूसरी ओर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की अलग टीम मौत के कारणों का विश्लेषण कर रही है।

मालूम हो कि आशियाना के सीता विहार कालोनी निवासी कीर्ति पाल को रविवार शाम प्रसव पीड़ा के बाद लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पीडि़ता के पति शुभम के अनुसार कि सोमवार की सुबह लेबर रूम में प्रसव हुआ था। जहां शिशु फर्श पर गिर गया था। सिर पर गहरी चोट से शिशु की तबीयत गंभीर हो गई थी। डॉक्टर-कर्मचारियों की हीलाहवाली की कीमत शिशु को जान गंवाकर चुकानी पड़ी थी। परिजनों की जिद पर शिशु का पोस्टमार्टम कराया गया था। अस्पताल प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने घटना के समय मौजूद तीन महिला चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों, वार्ड कर्मचारियों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के अलग-अलग बयान दर्ज किए। समिति यह पता लगाने में जुटी है कि प्रसव के दौरान चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं तथा किस स्तर पर चूक हुई। इसके साथ ही मरीज की केस शीट, ड्यूटी रोस्टर और उपचार से जुड़े सभी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का होगा विश्लेषण

मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक अलग टीम को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन कर यह स्पष्ट करेगी कि नवजात की मृत्यु का वास्तविक कारण क्या था और क्या प्रसव के दौरान हुई घटना का उससे प्रत्यक्ष संबंध था। विशेषज्ञों की राय को अंतिम जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया निरीक्षण

मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवार कल्याण महानिदेशालय की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक डॉ. स्वदेश कुमारी ने अस्पताल पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और सभी रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।

रात की ड्यूटी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

घटना के बाद अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार विभाग में छह महिला रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद रात में कई चिकित्सक ऑन-कॉल व्यवस्था के तहत रहते हैं। इससे आपात स्थिति में मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलने में दिक्कतें आती हैं। सूत्रों का कहना है कि रात की ड्यूटी व्यवस्था की भी जांच के दायरे में समीक्षा की जा रही है। इस प्रकार के आरोप लग रहे हैं कि रात के समय अस्पताल में सीनियर डाक्टर मरीजों पर ध्यान नहीं देते। कई बार तो ड्यूटी लगने के बावजूद सीनियर डाक्टर अस्पताल छोडक़र चले जाते हैं। रात्रिकालीन चिकित्सा व्यवस्था जूनियर डाक्टरों के भरोसे चलती है।

डिप्टी सीएम ने दिए सख्त निर्देश

डिप्टी मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर डॉक्टर, नर्स या अन्य कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं व नवजातों की सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। डिप्टी सीएम की सख्ती के बाद अस्पताल में हडक़म्प मच गया है। ऐसा माना जा रहा है कि इस मामले में किसी बड़े चिकित्सक पर कार्रवाई हो सकती है।

ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं

WhatsApp Channel, Google News और सोशल मीडिया पर फॉलो करें

Mahima Tiwari

महिमा तिवारी, द कवरेज में सीनियर पत्रकार हैं। पत्रकारिता में 23 साल का अनुभव रखतीं हैं। वह राजनीति, हेल्थ, लाइफ स्‍टाइल और ह्यूमन एंगल स्टोरीज लिखती हैं। महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर भी लिखना पसंद है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button