HealthIndia

सिर्फ यूपी ही नहीं, पूरे देश में 20 मिनट में पहुंचेगी एंबुलेंस, केंद्र सरकार ने जारी की नई NAS गाइडलाइन

नई दिल्ली: देश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं (Emergency Medical Services) को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। नेशनल एंबुलेंस पॉलिसी को लेकर नई गाइडलाइन जारी की गई हैं। अब एंबुलेंस सिर्फ मरीजों को ढोने वाला वाहन नहीं रहेंगी। इन्हें पूरी तरह से जीवन रक्षक प्रणाली (Life Support System) से लैस किया जाएगा।

इस नई पॉलिसी का मुख्य फोकस रिस्पांस टाइम कम करने और ‘गोल्डन आवर’ में मरीज की जान बचाने पर है। इन सब से अलग आगे चलकर एंबुलेंस सेवाओं को 112 इमरजेंसी नंबर से भी जोड़ा जाएगा, ताकि लोगों को एक ही नंबर पर सभी तरह की आपातकालीन मदद मिल सके। अब तक सिर्फ उत्‍तर प्रदेश की एंबुलेंस ही इन सुविधाएं से लैंस हैं, सरकार का प्रयास है कि उत्‍तर प्रदेश जैसी सुविधा पूरे देश में संचालित की जाए।

पॉलिसी में क्या हुए हैं बड़े बदलाव?

सरकार ने एंबुलेंस के मानक और संचालन को लेकर सख्त और स्पष्ट नियम तय किए हैं।

  • एंबुलेंस की कैटेगिरी: अब एंबुलेंस को बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS), एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) और पेशेंट ट्रांसपोर्ट व्हीकल (PTV) में स्पष्ट रूप से बांटा गया है। हर कैटेगिरी के लिए उपकरणों की एक फिक्स लिस्ट अनिवार्य होगी।

  • ट्रेन्ड पैरामेडिकल स्टाफ: एंबुलेंस में केवल ड्राइवर नहीं, बल्कि प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) का होना अनिवार्य कर दिया गया है।

  • जीपीएस और डिजिटल ट्रैकिंग: 108 या 102 जैसी केंद्रीकृत एंबुलेंस सेवाओं की लाइव ट्रैकिंग होगी। मरीज के परिजन और अस्पताल दोनों एंबुलेंस की रियल-टाइम लोकेशन देख सकेंगे।

  • अस्पतालों से सीधा संपर्क: गंभीर मरीजों को लाते समय एंबुलेंस सीधे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से कनेक्टेड रहेगी। इससे अस्पताल पहुंचने से पहले ही डॉक्टरों की टीम अलर्ट मोड पर आ जाएगी।

20 मिनट में पहुंचाने का लक्ष्य

नई गाइडलाइन के तहत सरकार ने पहली बार पूरे देश के लिए एंबुलेंस के पहुंचने का समय तय किया है. अब इमरजेंसी कॉल मिलने के बाद एंबुलेंस को औसतन 20 मिनट के अंदर घटनास्थल तक पहुंचने का लक्ष्य दिया गया है. वहीं, कंट्रोल रूम को कॉल मिलने के तीन मिनट के अंदर एंबुलेंस रवाना करनी होगी. अगर तय समय का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

20 सेकेंड में उठानी होगी कॉल

नई व्यवस्था में सिर्फ एंबुलेंस भेजने पर ही नहीं, बल्कि कॉल सेंटर की जिम्मेदारी भी तय की गई है. अब 95 प्रतिशत इमरजेंसी कॉल 20 सेकंड के अंदर उठानी होंगी. अगर किसी कारण से कॉल छूट जाती है, तो उस व्यक्ति को वापस कॉल करना जरूरी होगा. इससे लोगों को मदद के लिए बार-बार फोन नहीं करना पड़ेगा और समय की बचत होगी. साथ ही कॉल सेंटर में डॉक्‍टर भी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे।

मरीजों और आम जनता को क्या होगा फायदा?

नई पॉलिसी के लागू होने से स्वास्थ्य ढांचे में कई जमीनी सुधार देखने को मिलेंगे:

  • तेज रिस्पांस टाइम: कंट्रोल रूम को डिजिटल रूप से अपग्रेड किया जा रहा है। कॉल आते ही सबसे नजदीकी एंबुलेंस मरीज तक पहुंचेगी।

  • रास्ते में मिलेगा बेहतर इलाज: हार्ट अटैक या ट्रॉमा के मरीजों को एंबुलेंस के अंदर ही प्राथमिक और सटीक इलाज मिल सकेगा।

  • ग्रामीण इलाकों तक पहुंच: नई गाइडलाइन में ग्रामीण और सुदूर इलाकों में एंबुलेंस की संख्या और पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

  • जवाबदेही तय होगी: अगर एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचती है या उसमें जरूरी उपकरण खराब मिलते हैं, तो संबंधित एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

यह कदम देश भर के हेल्थकेयर सिस्टम में मील का पत्थर साबित होगा। इससे दुर्घटनाओं और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान होने वाली मौतों के आंकड़े में भारी कमी आने की उम्मीद है।

Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button