
लखनऊ। नकली और संदिग्ध दवाओं के खिलाफ योगी सरकार एक्शन मोड में है। बुधवार को उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने लखनऊ में एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। विभाग ने अमीनाबाद में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।
यहाँ बिना असली दवा सप्लाई किए करोड़ों की फर्जी बिलिंग हो रही थी। क्रॉस-बिलिंग और कागजी लेनदेन के जरिए नकली दवाओं को बाजार में खपाया जा रहा था। इस बड़े खेल में एफएसडीए की तहरीर पर अमीनाबाद थाने में चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ है।
एफआईआर में अंकुर अवस्थी, प्रोपराइटर हेल्थ प्लस, मनीष बाजपेयी, संचालक एमके फार्मा, गोविंद शुक्ला, संचालक राम फार्मा और ऐजाज अहमद, संचालक पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस, सहारनपुर को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन फर्मों के बीच बिना वास्तविक दवा सप्लाई के आपस में बिलिंग की गई और कागजों पर लेनदेन दिखाकर दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड तैयार किया गया।
बिना लाइसेंस दवाओं का कारोबार करने का आरोप
विभाग के मुताबिक अमीनाबाद स्थित हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी ने वैध औषधि लाइसेंस के बिना बड़े पैमाने पर दवाओं के भंडारण और लेनदेन का रिकॉर्ड तैयार किया। जांच में गोविंद शुक्ला की भूमिका भी सामने आई, जिन्हें विभाग ने फर्म के मुख्य कर्ताधर्ताओं में शामिल बताया है। जांच के अनुसार, हेल्थ प्लस और राम फार्मा एक ही फ्लोर पर संचालित हो रहे थे और इनके माध्यम से कथित तौर पर दवाओं के अवैध डायवर्जन और कागजी लेनदेन का नेटवर्क चलाया जा रहा था। सहारनपुर की पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस नामक फर्म, जो पिछले करीब दो वर्षों से बंद बताई गई है, का इस्तेमाल भी कथित तौर पर फर्जी खरीद और कागजी रोटेशन के लिए किया गया।

8.87 करोड़ रुपये की खरीद दिखाने का दावा
मामले में एमके फार्मा की भूमिका भी जांच के घेरे में है। विभाग के अनुसार, फर्म के संचालक मनीष बाजपेयी ने वित्तीय वर्ष 2026 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दिखाई। जांच के दौरान विभाग को कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें अन्य फर्मों के नाम पर Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup की खरीद दर्शाई गई थी।
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विभाग का कहना है कि साक्ष्य छिपाने के लिए लैपटॉप का पुराना डेटा भी डिलीट किया गया। दवाओं के निर्माताओं और संबंधित फर्मों से सत्यापन कराया गया तो उन्होंने इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया और संबंधित बैचों को काउंटरफिट बताया।
39.20 लाख Zoryl M1 का नहीं मिला हिसाब
जांच में एमके फार्मा से Zoryl M1 की करीब 39.20 लाख दवाओं का हिसाब नहीं मिलने की बात सामने आई है। विभाग का आरोप है कि इन दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में खपाया गया, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। एफएसडीए के अधिकारियों के मुताबिक, पूरे मामले में फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने, कूटरचना, नकली दवाओं के कारोबार और अवैध धन अर्जित करने की आशंका की जांच की जा रही है। इसी आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 111, 276, 277, 278, 318, 319, 336 और 338 के तहत कार्रवाई की गई है।
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लखनऊ में पहले भी सामने आ चुके हैं कई मामले
नकली दवाओं और फर्जी बिलिंग के खिलाफ चल रहे अभियान में लखनऊ में इससे पहले भी कई बड़ी कार्रवाई की जा चुकी हैं। विभाग के अनुसार, अमीनाबाद की आठ फर्मों और एक सॉफ्टवेयर डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ फर्जी बिलिंग और सॉफ्टवेयर में हेरफेर के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इनमें महाराजा इंटरप्राइजेज, शिव शक्ति फार्मा, श्री अशोक फार्मास्युटिकल्स, अपोलो फार्मेसी, शिव शक्ति मेडिकल, मीत इंटरप्राइजेज, विद्या फार्म और आरएन फार्मा के साथ मार्ग सॉफ्टवेयर के डिस्ट्रीब्यूटर आबिद अली शामिल हैं।
जुलाई 2026 में अमीनाबाद के एक कथित अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की नकली दवाएं बरामद की गई थीं। इसी तरह आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास करीब 1.60 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त की गईं। बख्शी का तालाब क्षेत्र में भी अवैध भंडारण और परिवहन के मामले में कार्रवाई की गई।
आगरा में भी सामने आया बड़ा नेटवर्क
एफएसडीए के अभियान के दौरान आगरा में भी नकली, री-लेबल की गई और सरकारी सप्लाई की दवाओं के अवैध कारोबार के कई मामले सामने आए हैं। विभाग के अनुसार, कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और नवबिया मार्केट में की गई कार्रवाई में 15 से अधिक संचालकों के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज कराई गईं।
जांच में कथित तौर पर फर्जी बिलों के जरिए टोरेंट फार्मा की नकली Chymoral Forte और Aciloc जैसी दवाओं की बिक्री तथा ESI और सरकारी कोटे की दवाओं की कालाबाजारी का मामला सामने आया। इसके अलावा अस्पतालों और सरकारी संस्थानों के लिए भेजी गई दवाओं के मूल लेबल हटाकर नए लेबल और मनमानी एमआरपी लगाकर खुले बाजार में बेचने का मामला भी पकड़ा गया।
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आगरा में एक अन्य कार्रवाई में Telma-H और Jardiance जैसी दवाओं की कथित री-लेबलिंग तथा निरस्त या कागजी फर्मों के जरिए करीब 1.88 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग का खुलासा हुआ।
विभाग के अनुसार, आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध, नकली तथा सरकारी/डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। मई 2026 में एक अवैध गोदाम से करीब 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की इंसुलिन, वैक्सीन और डिफेंस/ईएसआई
सप्लाई की दवाएं बिना आवश्यक कोल्ड-चेन के रखी मिली थीं। वहीं, करीब 50 लाख रुपये की नकली Oxalgin DP भी जब्त की गई थी।
दूसरे राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच
एफएसडीए अब नकली दवाओं के इस नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच कर रहा है। विभाग के मुताबिक लखनऊ के अमीनाबाद में एक अवैध गोदाम से बरामद नकली दवाओं के स्रोत की जांच राजस्थान तक पहुंची है। इस मामले में भूपेंद्र शर्मा और ट्रांसपोर्टर सतेन्द्र गुज्जर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। देहरादून में कथित तौर पर विभिन्न ब्रांड की नकली दवाएं तैयार करने वाली एक अवैध निर्माण इकाई के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है। मामले में राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा, विनय भटनागर, गौरव त्यागी और विनय चन्द्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
लाइसेंस निरस्तीकरण और एजेंटों पर भी होगी कार्रवाई
विभाग ने नकली और काउंटरफिट दवाओं की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए प्रदेशभर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश डॉ. रोशन जैकब ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों, स्थानीय थोक फर्मों और एजेंटों पर लगातार निगरानी रखने को कहा है। उनके अनुसार, जांच में दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों के लाइसेंस निरस्त करने के साथ उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। उद्देश्य नकली, अमानक, री-लेबल और अवैध दवाओं की सप्लाई चेन को उसके स्रोत तक पहुंचकर समाप्त करना है।




