लगातार भारी बारिश में भी डटे रहे शिक्षक कर्मचारी, लखनऊ के इको गार्डन में अटेवा की महारैली, सरकार को 3 महीने का अल्टीमेटम

लखनऊ। मूसलाधार बारिश और खराब मौसम के बावजूद पेंशन के दीवाने अटेवा के सिपाहियों के हौसले को डिगा ना सकी। भारी बारिश के बीच राजधानी के इको गार्डन मैदान में हजारों शिक्षक-कर्मचारी जुटे और पुरानी पेंशन बहाली के लिए हुंकार भरी। अटेवा (ATEWA) और नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) के बैनर तले आयोजित इस महारैली में पूरे उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी कर्मचारी पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘OPS’ लिखे छाते नजर आए और पूरा मैदान नारों से गूंज उठा।
कर्मचारियों की मुख्य मांगों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता खत्म करना और सरकारी विभागों के निजीकरण पर रोक लगाना शामिल रहा।
सरकार को 3 महीने का अल्टीमेटम: विजय कुमार ‘बन्धु’
महारैली को संबोधित करते हुए NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ ने कहा कि शिक्षक और कर्मचारी किसी भी कीमत पर एनपीएस (NPS), टीईटी अनिवार्यता और निजीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे।
उन्होंने दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा, “यदि सरकार ने कर्मचारियों के आक्रोश को गंभीरता से नहीं लिया, तो ठीक तीन महीने बाद लखनऊ में ‘डेरा डालो-घेरा डालो’ आंदोलन शुरू होगा और क्रमिक अनशन किया जाएगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि निजीकरण ने बेरोजगारी बढ़ाई है, जबकि शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार की गारंटी देना सरकार की पहली जिम्मेदारी है।
महिलाओं और क्षेत्रीय जत्थों की मजबूत भागीदारी
रैली में पूर्वांचल, बुंदेलखंड, तराई बेल्ट और पश्चिमांचल से बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। महिला मोर्चा प्रभारी रंजना सिंह ने कहा कि पेंशन बहाली के इस संघर्ष में महिला कर्मचारी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रही हैं।
प्रदेश उपाध्यक्ष सत्येन्द्र कुमार राय,चन्द्रहास सिंह, डा० आशाराम ने कहा कि- NPS निजीकरण देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक है तथा पूंजीपतियों को लाभ देने की व्यवस्था है जिसका अटेवा मुखर रूप से विरोध करता है। स्वास्थ्य महासंघ के महामंत्री अशोक कुमार ने कहा कि- चुनाव देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।आगामी विधान परिषद के चुनाव में विजय कुमार ‘बन्धु’ का स्नातक निर्वाचन में प्रत्याशी बनना शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए गौरव की बात है।
पी डब्लू डी वर्क चार्ज कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भारत सिंह ने कहा कि- अटेवा ने पुरानी पेंशन के मृत्यु मुद्दे को जीवित किया है और विजय बन्धु के संघर्ष के बल पर ही देश के कई राज्यों में पुरानी पेंशन बहाल हुई है। वरिष्ठ कर्मचारी नेता रामराज दूबे एवं रामेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि- अटेवा के संघर्ष की बदौलत सरकार ने NPS में अनेकों संशोधन किए और विज्ञापन के आधार पर शिक्षक,कर्मचारियों के एक बड़े समूह को पुरानी पेंशन दी। रेलवे के वरिष्ठ नेता कमल उसरी ने कहा कि- विजय कुमार ‘बन्धु’ द्वारा निजीकरण के मुखर विरोध ने देश के लाखों बेरोजगार युवाओं के हक की आवाज को बुलन्द करने का कार्य किया है।विजय कुमार ‘बन्धु’ को सदन में भेजना हम सभी का दायित्व होना चाहिए।

आधी आबादी का प्रतिनिधित्व कर रही अटेवा की प्रदेश महिला मोर्चा प्रभारी रंजना सिंह ने कहा कि- हमारी बहनें अटेवा के हर संघर्ष में साथ हैं। आई टी सेल व सोशल मीडिया के पदाधिकारियों अभिनव सिंह राजपूत,दानिश इमरान,आर्यनवेद, वीरेंद्र कुमार, कुलदीप सैनी ने कहा कि- सोशल मीडिया और तकनीकि के माध्यम से अटेवा के मुद्दों को जन- जन तक पहुंचाने का कार्य किया जायेगा। बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश महेंद्र कुमार यादव ने कहा इस लड़ाई में हम अटेवा के साथ हैं।
महारैली में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रभारी धर्मेन्द्र गोयन एवं सुमन कुरील ने अपने पेंशन गीतों से पेंशनमय बना दिया।
महारैली का संचालन प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरज पति त्रिपाठी, प्रदेशमंत्री विजय प्रताप बूढ़नपुरी और प्रदेश संयुक्त मंत्री जनार्दन शुक्ल ने संयुक्त रूप से किया।
धरना स्थल पर पहुंचे पुलिस उपायुक्त (DCP) ने कर्मचारियों का ज्ञापन स्वीकार किया। प्रशासन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल की वार्ता मुख्य सचिव से कराने और एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री से वार्ता का समय दिलाने का औपचारिक आश्वासन दिया गया, जिसके बाद रैली का समापन हुआ।
इस महारैली में मध्यप्रदेश से परमानंद डहेरिया,दिल्ली से मंजीत राणा, हरियाणा से विजेन्द्र धारीवाल,पंजाब से सुखजीत सिंह,रेलवे से अखिलेश पाण्डेय,विक्रमादित्य मौर्य,ओम प्रकाश कन्नौजिया,नरेन्द्र कुमार,संदीप वर्मा,राजेश जायसवाल,अशोक कन्नौजिया, डॉ भूरी सिंह,अखिलेश यादव,राकेश रमन ,संजय उपाध्याय,रजत प्रकाश,राधा प्यारी रावत,वीरेन्द्र पटेल ,राघवेंद्र सिंह, राकेश कुमार वर्मा समेत विभिन्न शिक्षक,कर्मचारी संगठनों के लोग उपस्थित रहे।
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