11 माह की बच्ची के दिल को मिली नई जिन्दगी

बिना ओपन हार्ट सर्जरी के किया गया PDA डिवाइस क्लोजर
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS ) के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने एक 11 माह की बच्ची को नया जीवन दिया। बच्ची को जन्म से हार्ट की ऐसी समस्या थी, जिसका ओपन हार्ट सर्जरी के बिना इलाज करना आसान नहीं था। उसकी कम उम्र को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना छाती खोले विशेष डिवाइस से उसे ठीक कर दिया।
संस्थान के कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ भुवन चंद्र तिवारी (Dr. Bhuvan Chandra Tiwari) ने बताया कि बच्ची में जन्म से ही हृदय के पास मौजूद एक प्राकृतिक रक्त वाहिका बंद नहीं हुई थी। इसे PDA (Patent Ductus Arteriosus) कहा जाता है। सामान्य स्थिति में यह रक्त वाहिका जन्म के बाद बंद हो जाती है। इसके खुले रहने पर फेफड़ों में रक्त का प्रवाह बढ़ सकता है, जिससे समय के साथ हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पडऩे की आशंका रहती है।
बच्ची की कम उम्र को देखते हुए कार्डियोलॉजी टीम ने कैथेटर आधारित इंटरवेंशनल प्रक्रिया के माध्यम से PDA को विशेष डिवाइस लगाकर बंद करने का निर्णय लिया। इस तकनीक में ओपन हार्ट सर्जरी की तरह छाती खोलने की आवश्यकता नहीं होती। सफल प्रक्रिया के बाद बच्ची को डाक्टरों की निगरानी में रखा गया और स्थिति सामान्य रहने पर उसे छुट्टी दे दी गई।
संस्थान का दावा है कि यहां पहली बार एक वर्ष से कम उम्र के शिशु का इस तरह कैथेटर आधारित क्कष्ठ्र क्लोजर किया गया है। इस प्रक्रिया में प्रो. (डॉ.) भुवन चंद्र तिवारी के नेतृत्व में डॉ. आशीष झा, डॉ. मिथिलेश यादव और डॉ. नीरज अवस्थी भी शामिल रहे।
जन्मजात रोगों की समय पर पहचान जरूरी: डा. भुवन चंद्र तिवारी
डा. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि ASD, VSD और PDA जैसे जन्मजात हृदय रोगों की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में बच्चों को तेज सांस चलना, दूध पीते समय जल्दी थक जाना या पसीना आना, वजन का अपेक्षित रूप से न बढऩा और बार-बार छाती में संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इनमें से कई रोगों का उपचार अब उपयुक्त मरीजों में कैथेटर आधारित डिवाइस तकनीक से बिना ओपन हार्ट सर्जरी के किया जा सकता है। समय पर जांच और उचित उपचार मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य और विकास पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
क्या होते हैं ASD, VSD और PDA
बच्चों में कुछ हृदय संबंधी समस्याएं जन्म से मौजूद होती हैं, जिन्हें Congenital Heart Disease यानी जन्मजात हृदय रोग कहा जाता है। इनमें ASD, VSD और PDA सामान्य जन्मजात हृदय दोषों में शामिल हैं।
ASD (Atrial Septal Defect):
हृदय के ऊपर के दो कक्षों के बीच की दीवार में छेद को ASD कहा जाता है। छोटा ASD कई बार अपने आप बंद हो सकता है, जबकि बड़ा छेद लंबे समय तक रहने पर हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
VSD (Ventricular Septal Defect):
हृदय के नीचे के दो मुख्य कक्षों के बीच की दीवार में छेद को VSD कहा जाता है। बड़ा VSD होने पर बच्चे में सांस फूलना, दूध पीने में कठिनाई, बार-बार संक्रमण तथा वजन न बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है।
PDA (Patent Ductus Arteriosus):
गर्भ में बच्चे के रक्त संचार के लिए एक प्राकृतिक रक्त वाहिका, ductus arteriosus, मौजूद होती है। सामान्यतः जन्म के बाद यह बंद हो जाती है। यदि यह खुली रह जाए तो इसे PDA कहा जाता है। बड़ा PDA फेफड़ों में अधिक रक्त प्रवाह और आगे चलकर pulmonary hypertension का कारण बन सकता है।
इन लक्षणों पर दें ध्यान-
– दूध पीते समय जल्दी थकना या अत्यधिक पसीना आना
– सांस तेज चलना या सांस फूलना
– बच्चे का वजन अपेक्षा के अनुसार न बढऩा
– बार-बार निमोनिया या छाती का संक्रमण होना
– खेलते या चलते समय जल्दी थक जाना
– होंठ या शरीर का नीला पडऩा
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