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NHAI Ambulance: हाईवे पर एंबुलेंस लेट हुई तो लगेगा 10 हजार का जुर्माना, 10 मिनट में पहुंचना होगा अनिवार्य; जानें नए नियम

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नेशनल हाईवे (National Highways) पर सफर करने वालों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अक्सर सड़क दुर्घटनाओं के बाद एंबुलेंस के देर से पहुंचने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है। इसे देखते हुए NHAI ने एंबुलेंस सेवाओं के लिए नई और सख्त गाइडलाइंस (NHAI Ambulance New Guidelines) जारी की हैं।

नए नियमों के तहत अब एंबुलेंस को दुर्घटना की सूचना मिलने के 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचना होगा। यदि सर्विस प्रोवाइडर या एंबुलेंस टीम इसमें विफल रहती है, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। गौरतलब है कि किसी भी नेशनल हाइवे पर 1033 नंबर पर डायल करके एंबुलेंस उपलब्‍ध कराई जाती है। यह सेवा 24 घंटे उपलब्‍ध रहती है।

आइए जानते हैं NHAI के इन नए नियमों की पूरी डिटेल और यह भी कि तकनीकी रूप से इसे कैसे कंट्रोल किया जाएगा:

1. ‘गोल्डन ऑवर’ (Golden Hour) का रखा गया खास ध्यान

NHAI का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में घायल हुए लोगों को ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के बाद का पहला एक घंटा, जो जान बचाने के लिए सबसे अहम होता है) के भीतर अस्पताल पहुंचाना है। नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि एंबुलेंस घायल व्यक्ति को तय समय के भीतर अस्पताल या नजदीकी ट्रॉमा सेंटर पहुंचाने में विफल रहती है, तो 10,000 रुपये का भारी भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।

2. NHAI CARE सिस्टम और GPS हुआ अनिवार्य

अब पूरा सिस्टम डिजिटल और रियल-टाइम मॉनिटरिंग पर आधारित होगा। NHAI ने पुरानी प्रणाली को अपग्रेड करके ‘NHAI CARE सिस्टम’ लागू किया है।

  • हाईवे पर तैनात सभी एंबुलेंस, क्रेन और गश्ती (Patrol) वाहनों में AIS-140 मानकों वाले GPS और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) सिम से लैस टैबलेट या मोबाइल फोन होना अनिवार्य कर दिया गया है।

  • इन डिवाइस में हर समय NHAI Care ऐप एक्टिव होना चाहिए। टोल फ्री नंबर 1033 पर कॉल आने के तुरंत बाद एंबुलेंस को इसी ऐप के माध्यम से रियल-टाइम टिकट (अलर्ट) भेजा जाएगा।

3. हर मिनट की देरी की तय हुई कीमत (कड़े जुर्माने)

सिस्टम को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए NHAI ने सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) को बेहद सख्त कर दिया है:

  • अलर्ट स्वीकार करने में देरी: ऐप पर टिकट (अलर्ट) आने के 1 मिनट के अंदर उसे एक्सेप्ट करना होगा। यदि ऐसा नहीं किया, तो हर 1 मिनट की देरी पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा।

  • अलर्ट रिजेक्ट करने पर: अगर कोई एंबुलेंस टीम बिना किसी वैध कारण के ऐप पर मिली सूचना को अस्वीकार (Reject) करती है, तो उस पर सीधा 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

  • डिवाइस बंद होने पर: यदि एंबुलेंस का जीपीएस काम नहीं कर रहा है या डिवाइस में NHAI Care ऐप दिन भर में 1% से ज्यादा समय के लिए बंद या अनअवेलेबल रहता है, तो 2,500 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना होगा।

  • दवाओं या स्टाफ की कमी: अचानक होने वाले निरीक्षण (Inspection) के दौरान यदि एंबुलेंस में पैरामेडिकल स्टाफ, जीवन रक्षक उपकरण या जरूरी दवाएं कम पाई जाती हैं, तो प्रति चेकिंग 10,000 रुपये का जुर्माना होगा।

4. क्षेत्र या सीमा का बहाना नहीं चलेगा

नए नियमों में स्पष्ट रूप से यह निर्देश दिया गया है कि अगर हाईवे पर किसी प्रोजेक्ट के तय दायरे के बाहर या आसपास भी कोई दुर्घटना होती है और वहां कोई दूसरी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो तैनात एंबुलेंस को अपनी सीमा से बाहर जाकर भी मदद करनी होगी। “यह मेरा क्षेत्र नहीं है” जैसी कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

5. रोजाना करनी होगी 5 किलोमीटर की ‘मॉक ड्रिल’

एंबुलेंस हर वक्त स्टार्ट होने और अच्छी स्थिति में रहने के लिए NHAI ने रोजाना 5 किलोमीटर की ड्राई रन (Mock Drill) अनिवार्य कर दी है। हालांकि, अगर किसी दिन एंबुलेंस हादसे के सिलसिले में 5 किमी से अधिक चल लेती है, तो उसे इस ड्रिल से छूट मिलेगी। ऐसा न करने पर मासिक जुर्माना काटा जाएगा।

क्या होगा इन नियमों का असर? आंकड़ों के मुताबिक, भारत के नेशनल हाईवे पर हर साल हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। त्वरित चिकित्सा देखभाल (Quick Medical Care) मिलने से लगभग 50% से अधिक जानें बचाई जा सकती हैं। NHAI की यह नई पॉलिसी न सिर्फ हाईवे प्रबंधन को दुरुस्त करेगी, बल्कि यह सुनिश्चित करेगी कि आपात स्थिति में कोई भी पीड़ित मदद से वंचित न रहे।

Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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